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Hindi Section ( 4 Jan 2019, NewAgeIslam.Com)

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Early Muslim History Needs Fresh Appraisal — VI यह एक लंबी दास्तान है कि मजूसी साजिशों ने किस प्रकार इस्लाम को बदल दिया



एम आमिर सरफ़राज़

२० नवंबर, २०१८

प्रारम्भिक मुस्लिम इतिहास पर आधारित आज जिस रूप में इस्लाम हमारे सामने मौजूद है है इसे अल्लामा इकबाल ने ‘अजमी इस्लाम’ और सर सैयद अहमद खान ने ‘इख्तेराई इस्लाम’ और जमालुद्दीन अफगानी ने, ‘जबरी इस्लाम’ कहा हैl हम इसके हल की ओर बढ़ें इससे पहले इस बात की समीक्षा कर लेते हैं कि आखिर हम किस मुसीबत में गिरफ्तार हैंl

हदीसों के छः सुन्नी और चार शिया मुदव्वेनीन फ़ारसी (मजूसी) मूल थेl मुसलामानों की एक बड़ी अक्सरियत इन हदीस की किताबों को कामिल व मुकम्मल और कुरआन पाक के बाद सबसे अधिक प्रमाणिक मानती हैl तथापि, इनमें से अक्सर लेखक एक दुसरे के बारे में अच्छी राय नहीं रखते थेl शीर्ष मुस्लिम इतिहासकार और कुरआन मजीद के एक अजीम मुफस्सिर इमाम तबरी फ़ारसी मूल के थेl इस इस्लाम के तार्किक प्रभाव जहां दोसरे रूप में ज़ाहिर हुए वहीँ इसका एक पेश खेमा बहाई मज़हब के रूप में भी सामने आयाl बहाई नबी बहाउल्लाह ने फारस के बादशाह यजुद गुर्द III की नस्ल से होने का दावा कियाl उपमहाद्वीप में नबूवत के दो विशेष दावेदार मोहम्मद जौनपुरी और मिर्ज़ा गुलाम अहमद कादियानी भी फ़ारसी मूल के ही थेl

हम में से अधिकतर लोगों ने एक अत्यधिक प्रसिद्ध पुस्तक तफसीरे कबीर का नाम सूना ही होगा जिसके लेखक इमाम फखरुद्दीन राज़ी हैंl वह भी फ़ारसी मूल ही के थेl ३०० जिल्दें लिखने के बाद इमाम राज़ी ने एक साहसिक एतराफ़ किया था कि, “कुरआन की तफसीर व तशरीह में मेरी सभी तार्किक और बौद्धिक लेख त्रुटिपूर्ण हैंl तथाकथित इमामों (तबरी, ज़मखशरी, इब्ने कसीर, बुखारी और मुस्लिम आदि) की सारी तफसीरें गुमराह कुन हैंl हम सब शैतान के हथकंडा बन गएl हमारी रूह हमारी जिस्मानी ख्वाहिशात की आलूदगी में डूबी हुई हैl और इस दुनिया के हमारे सारे काम और हमारी सारी कोशिशें हमारे लिए केवल अबदी ज़िल्लत और अज़ाब व इताब का कारण हैंl”

मजूसी साज़िशों ने किस प्रकार इस्लाम को बदल दिया यह एक लंबी दास्तान हैl उनकी साजिशों ने हमारा क्या नुक्सान किया है इसका एक जायजा शायद हमारे लिए काफी हो

सलात (नमाज़) कुरआन ए पाक की एक सैद्धांतिक कल्पना है लेकिन हमारे सामने इसे रिवायती नमाज़ के तौर पर पेश किया गयाl असल में नमाज़ एक ऐसी रिवायत है जिसे आतिश परस्त आग के सामने अदा करते थेl दरअसल सलात एक व्यापक अवधारणा हैl यह इंसान को अल्लाह के अहकामात का स्थायी रूप से पालन करने वाला बनाता है और एक ऐसा सामाजिक प्रबंधन स्थापित करने के लिए हमारे उपर सामूहिक संघर्ष को अनिवार्य करता है जिसमें समाज का कोई भी व्यक्ति किसी दोसरे के दबाव में ना रहे (कुरआन १:१-७)l रिवायती नमाज़ सलात (अकिमिस्सलात) के कयाम में केवल एक छोटा सा हिस्सा हैl इसी प्रकार, ज़कात जिसे कुरआन में नमाज़ के साथ जोड़ कर पेश किया गया है हुकूमत और अवाम के लिए है और इसका उद्देश्य उनकी दौलत और साधनों को दोसरे इंसानों के कल्याण के लिए उपलब्ध कराना हैl ना कि ज़कात के नाम पर केवल २.५ प्रतिशत निकालनाl बल्कि लोगों को इतना देना चाहिए “जो उनकी आवश्यकताओं से अधिक होl” (कुरआन ए करीम: २:२१९)l

कुरआन में किसी भी मसीह या महदी का कोई उल्लेख नहीं है और इसके बारे में कोई एक भी प्रामाणिक हदीस पेश नहीं की जा सकतीl तथापि, एक ऐसे महदी पर विश्वास हमारे अकीदे का एक आवश्यक हिस्सा बन चुका है जो कयामत से पहले आएँगे, इस दुनिया पर हुकुमत करेंगे और यहाँ से बुराई का खात्मा करेंगेl जब कभी मुसलामानों के लिए संकट के समय का उल्लेख होता है इस अकीदे और मसीह की अनुमानित आमद पर काफी ध्यान दिया जाता हैl

जिहाद की ताज़ा रूह की वजह से इतिहास के किसी भी मोड़ पर मुसलामानों के अन्दर कभी हिम्मत व जवांमर्दी की कोई कमी स्थित नहीं हुईl बदकिस्मती से उन्हें हमेशा अपने ही लोगों ने तबाह व बर्बाद किया हैl जब जब और जहां जहां भी संभव था लोग दिल व जान से इस साज़िश के खिलाफ खड़े हुएl

पूरे इस्लामी इतिहास में विभिन्न धार्मिक मुहीम चलाने वालों ने अपने एजेंडे में सफलता प्राप्त करने के लिए इस अकीदे का प्रयोग किया हैl आतिश परस्तों ने हमेशा अपनी निजात के लिए एक मसीहा (मतीरा) का इंतज़ाम किया हैl असल में मजूसी सभ्यता ने इस अवधारणा के कारण अपनी बिरादरियों का लगातार कई बार उत्थान और पतन देखा है यहाँ तक कि इस्लाम ने उन्हें और पूरी इंसानियत को खतमे नबूवत के माध्यम से इस घातक रोग से निजात अता कियाl लेकिन बदकिस्मती से हम ने वह इस्लाम विकल्प कर लिया है जिसे अल्लामा इकबाल ने अजमी इस्लाम करार दिया हैl

मैं पहले ही यह ज़िक्र कर चुका हूँ कि इस बड़ी साज़िश का बुनियादी उद्देश्य कुरआन को निशाना बनाना थाl सबसे पहले कुरआन ए करीम के तर्ज़े कलाम, मवाद और बनावट के बारे में शक व शुबहा पैदा करने के लिए अप्रमाणिक हदीसें इजाद की गईंl फिर शाने नुज़ूल के माध्यम से कुरआन ए करीम की लगभग हर आयत का अर्थ निश्चित करने के लिए इसका प्रयोग किया गयाl इस साज़िश का उद्देश्य कुरआन ए मजीद की वज़ाहत या तफसीर के माध्यम से प्राप्त हो गयाl इस योजना के तीनों वर्ग एक मजबूत सिद्धांत की शकल में पेश किए गए और बाद में जिस किसी ने भी सरकारी तौर पर स्वीकृत नुस्खे या अपने समय के इमाम से मतभेद करने का प्रयास किया उसे हुक्काम ने अत्याचार का निशाना बनाया और गैर मोतदिल उलेमा ने इसे इस्लाम के दायरे से बाहर निकाल फेंकाl इन सभी साजिशों का जाल बहुत बुद्धिमान और विशेषज्ञ मजूसी ‘मुसलमानों’ ने बिछाया था जिसमें इनका साथ जान बुझ कर या नादानी में उनके शाही सरपरस्तों और भ्रष्ट उलेमा ने दिया और इसमें दुसरे धर्मों ने भी इनकी पूरी सहायता कीl

जिहाद की ताज़ा रूह की वजह से इतिहास के किसी भी मोड़ पर मुसलामानों के अन्दर कभी हिम्मत व जवांमर्दी की कोई कमी नहीं हुई हैl बदकिस्मती से उन्हें हमेशा अपने ही लोगों ने तबाह व बर्बाद किया हैl जब जब और जहां जहां भी संभव था लोग दिल व जान से इस साज़िश के खिलाफ खड़े हुएl हम उनको नहीं जानते क्योंकि उन पर अत्याचार और उनके क़त्ल के बाद उनके नाम और काम इतिहास के पृष्ठों से संगठित तरीके से मिटा दिए गएl अबू मुस्लिम अस्फहानी, अबुल कासिम बल्खी और अकील बिन असद का सफाया इतने संगठित तरीके से किया गया कि आज दोसरों की किताबों में उनके नाम बहुत मामूली और बहुत नाकारात्मक अंदाज़ में पाए जाते हैंl चूँकि अक्सर पेश आने वाले एतेहासिक विवाद बड़े पैमाने पर बगावत की शकल विकल्प कर चुके होंगे इसलिए इस्लाम को भी उसी चाल से बर्बाद कर दिया गया जो ईसाइयत के खिलाफ चली गई थी____

स्रोत:

dailytimes.com.pk/323992/early-muslim-history-needs-fresh-appraisal-vi/

URL for English article: http://www.newageislam.com/islamic-history/m-aamer-sarfraz/how-islam-changed-as-a-result-of-magian-machinations-is-a-long-story--early-muslim-history-needs-fresh-appraisal-—-vi/d/116983

URL for Urdu article: http://www.newageislam.com/urdu-section/m-aamer-sarfraz,-tr-new-age-islam/early-muslim-history-needs-fresh-appraisal-—-vi--یہ-ایک-طویل-داستان-ہے-کہ-مجوسی-سازشوں-نے-کس-طرح-اسلام-کو-بدل-دیا/d/117333

URL: http://www.newageislam.com/hindi-section/m-aamer-sarfraz,-tr-new-age-islam/early-muslim-history-needs-fresh-appraisal-—-vi--यह-एक-लंबी-दास्तान-है-कि-मजूसी-साजिशों-ने-किस-प्रकार-इस्लाम-को-बदल-दिया/d/117366

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