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Hindi Section (24 Apr 2017 NewAgeIslam.Com)


It Is True That ‘Terrorism Has No Religion’ यह सच है कि 'आतंकवाद का कोई धर्म नहीं है' लेकिन इस्लाम को आधुनिकता को गले लगाना ही होगा



राकेश सिन्हा

18 जुलाई 2016

आईएसआईएस के एक नक्शे में भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश को जल्द ही इसके प्रमुख बगदादी के नियंत्रण में दिखाया गया हैl आईएसआईएस के मैगजीन “दाबिक” में 1920 के दशक में तुर्की में खिलाफत के पतन के खिलाफ "भारतीय मुसलमानों की शानदार भूमिका" का उल्लेख किया गया है। खुरासान के अमीर हाफ़िज़ सईद खान ने दाबिक के एक साक्षात्कार में कहा कि भारत में "मुसलमान जल्द ही खिलाफत के फैलने के बारे में जल्द ही समाचार सुनेंगे"। हालांकि, इस तरह की बातों से भारतीय मुसलमानों पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ सका। लेकिन आईएसआईएस ने अपने इस बयान से चन्द सौ भारतीय मुस्लिम युवकों को अपने जाल में ज़रूर फंसाया होगाl उनकी संख्या कम हो सकती है लेकिन यह चिंता का एक बड़ा कारण है।

यहाँ, मुस्लिम उलेमा और अश्राफिया दोनों की भूमिका समान रूप से महत्वपूर्ण है। देवबंद जैसे मदरसों को आईएसआईएस के द्वारा धार्मिक ग्रंथों की गलत व्याख्याओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान की अगुवाई करनी चाहिए। चुनौती और जोखिम दोनों मुस्लिम समाज के अंदर ही मौजूद हैं।

यह सच है कि 'आतंकवाद का कोई धर्म नहीं है'। लेकिन इससे हमें मौजूदा इस्लामी आतंकवाद के जटिल मुद्दे का समाधान नहीं मिलने वाला है। जब तक मुस्लिम समाज इन समस्याओं को स्वीकार नहीं करता तब तक ऐसे तत्व मुस्लिम नौजवानों के सरल मन में अपनी बीज बोते रहेंगे। अल्पसंख्यक संस्थानों और विशेष रूप से मुसलमानों द्वारा प्रशासित संस्थानों को इस्लाम की ऐसी सही स्पष्टीकरण के द्वारा आईएसआईएस को बेनकाब करना चाहिए जिनमें आधुनिकता पर जोर दिया गया हो और आईएसआईएस जैसी संगठनों के अत्याचार को उजागर किया गया हो। इन अल्पकालिक उपायों के अलावा, उन्हें आमतौर पर समकालीन के परिदृश्य में इस्लाम की धार्मिक समझ का नए सिरे से समीक्षा भी लेनी होगी।

अन्य सभी धर्मों ने अपने सहीफों में शमन और विकृत पैदा करके भी खुद का सुधार किया। दो इस्लामी अवधारणाओं 'जिहाद और काफ़िर' 'की व्याख्या एक बहुत उदारवादी अंदाज़ से लेकर एक अत्यंत यथार्थवादी शैली तक में किया गया हैl यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर भारतीय मुस्लिम मदरसों को विचार करने की जरूरत है। इसका एक और समाधान धर्मनिरपेक्ष शिक्षा भी हैl साझा स्कूली शिक्षा आपसी सहानुभूति और सद्भावना की भावना पैदा करते हैं। कई मदरसों की शिक्षाएं कट्टरपंथ की जड़ होती हैं। मस्जिदों में उलेमा उपदेश में अक्सर भारतीय मुसलमानों की महरूमी, उनके साथ भेदभाव और उनके मज़लूमियत की अवधारणा पर जोर देते हैंl यह कट्टरपंथ के लिए उसके अनुरूप नींव पैदा कर सकता है। इसे रोका जाना आवश्यक है।

तुर्की में दीनियात के नाम से प्रसिद्ध मामलों के विभाग उलेमा को धार्मिक मामलों में बिल्कुल स्वतंत्र विकल्प नहीं देते हैंl यह मस्जिदों में दिए जाने वाले भाषण के हर शब्द का अनुसंधान करते हैं। हमारे समाज में मुस्लिम कट्टरपंथ की सूक्ष्म तत्वों की उपस्थिति से इनकार नहीं किया जा सकताl खतरे में उस समय बढ़ोतरी हो जाती है जब देशी राजनीति आतंकवाद को अपनी शरण देती है। उदाहरण के रूप में, मार्क्सवादी इतिहासकार इरफान हबीब, कांग्रेसी नेता गुलाम नबी आजाद या मजलिसे इत्तेहादुल मुसलेमीन निर्वाचित ओवैसी जैसे लोग आरएसएस की तुलना आइएसआइएस के साथ करते हैं। क्या इससे भी बड़ा कोई मज़ाक हो सकता है? हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि उस समय आतंकवादियों को सम्मान प्राप्त होता है जब वह राजनीतिक चर्चा का केंद्र बनते हैं, जो आगे चलकर ध्रुवीकरण की वजह बनती है। इसलिए, इसका समाधान मीडिया में यह बहस करते हुए आतंकवाद और संयम पर सहमति की निर्माण में निहित हैl आइएसआइएस के खतरे से निपटते हुए आमतौर पर नागरिक समाज और मुख्यतः मुसलमानों को कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं अपनाना चाहिए।

स्रोत:

outlookindia.com/magazine/story/islam-has-to-embrace-the-modern-examine-its-theology-afresh/297493

URL for English article: http://www.newageislam.com/ijtihad,-rethinking-islam/rakesh-sinha/it-is-true-that-‘terrorism-has-no-religion’-but-islam-has-to-embrace-the-modern,-examine-its-theology-afresh/d/107930

 

URL for Urdu article: http://www.newageislam.com/urdu-section/rakesh-sinha,-tr-new-age-islam/it-is-true-that-‘terrorism-has-no-religion’--یہ-سچ-ہے-کہ--دہشت-گردی-کا-کوئی-مذہب-نہیں-ہے--لیکن-اسلام-کو-جدیدیت-کوگلے-لگانا-ہی-ہوگا/d/108401

 

URL: http://www.newageislam.com/hindi-section/rakesh-sinha,-tr-new-age-islam/it-is-true-that-‘terrorism-has-no-religion’--यह-सच-है-कि--आतंकवाद-का-कोई-धर्म-नहीं-है--लेकिन-इस्लाम-को-आधुनिकता-को-गले-लगाना-ही-होगा/d/110875


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TOTAL COMMENTS:-   2


  • Sir Abhi CIA Ne Bhi Bol Diya Hain
    RSS Shantivadi Sanghtan Hain!! 
    ISIS Ki Tarah

    By Silent - 7/4/2018 7:02:50 AM



  • दुबई और आबू धाबी में जुम्मे की नमाज के वक़्त खुतबे का एक-एक लफ्ज सरकार की मर्जी से तय होता है. कोई भी खुतावाख्वा अपने मन मुताबिक़ कुछ नहीं बोल सकता. इसी से यहाँ दहशतगर्दी पर लगाम लगी हुई है.
    By Nida Nabeel - 4/26/2017 2:10:07 AM



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