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Are ISIS, Taliban and Al-Qaeda Kahrijite Organisations?  क्या आइएसआइएस तालिबान और अलक़ायदा खारजी संगठन हैं? भाग- 1
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

इराक, सीरिया, यमन, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, सूडान, सोमालिया और अन्य प्रभावित देशों में समग्र रूप से जितनी जानों का खून बहाया गया है उनमें 99 प्रतिशत मुसलमान ही हैं। यहाँ घाव पर नमक छिड़कने वाली बात यह है कि अब तक यह आतंकवादी संगठन अपने घृणित इरादों और गलत उद्देश्यों की पूर्ति के लिए केवल इस्लाम और मुसलमानों के नाम का उपयोग कर रही हैं। कुरआनी आयातों, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की हदीसों और फ़िक़्ही रचनाओं का दरुपयोग और गलत व्याख्या करके अपने गैर इस्लामी कार्यों को जायज़ करार दे रही हैं और इस्लामी स्रोत से अनजान भोले-भाले मुसलमानों और युवाओं को प्रभावित कर रही हैं।

 

दुनिया बनाने और उसमें इंसानों के बसाए जाने के उद्देश्य को स्पष्ट किया, बताया कि सब का निर्माता और मालिक एक है, उसका कोई साझी नही, वही पूजा के योग्य है, दुनिया की व्यवस्था उसी के दम से है, हर चीज़ पर उसकी सरकार व संप्रभुता है, मृत्यु और जीवन का वही निर्माता है, लाभ व हानि का वही आविष्कारक है, उसकी इच्छा के बिना न कोई पत्ता हिल सकता है, ना कोई बूंद गिर सकता है, और न ही कोई चीज़ अस्तित्व में आ सकती है, उसनें एक उद्देश्य के तहत और एक निर्धारित समय देकर मनुष्य को संसार में भेजा है, मानव का वास्तविक जीवन आख़िरत है जो असीमित है इसके बाद खुदा की नज़दीकी और पुरस्कार प्राप्ती का आधार संसार में खुदा और पैगंबरे खुदा की आज्ञा के पालन पर निर्भर है, नबी ए रहमत की बेसत का उद्देश्य ही मनुष्य को अल्लाह की इच्छा बताना और इसके अनुसार जीवन जीने की व्यावहारिक स्थिति प्रदर्शित करना है,

How Islamic Is Instant Triple Talaq?  एक साथ तीन तलाक इस्लामी कैसे?
Sultan Shahin, Founding Editor, New Age Islam

हलाला भारतीय मुसलमानों के अंदर सबसे अश्लील सामाजिक कर्म है जिसे उलेमा के सभी वर्गों का समर्थन प्राप्त है। अगर तीन तलाक की प्रक्रिया समाप्त कर दिया जाए या एक ही बार में दी जाने वाली तीन तलाक को एक ही कुरआनी तलाक माना जाए तो यह सामाजिक मामूल खुद बखुद खतम हो जाएगा। जैसा कि मोरक्को, कुवैत, यमन, अफगानिस्तान, लीबिया, कुवैत, कतर, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, पाकिस्तान, बांग्लादेश, मिस्र, सीरिया, जॉर्डन, इराक, सूडान सहित 22 मुस्लिम देशों में इस पर अमल किया जाता है ।

 

The Period of Youth  किशोरावस्था का दौर
Maulana Wahiduddin Khan for New Age Islam

क्या हमने इस युग में दूसरों के साथ शांति और सद्भाव के साथ जीवन गुज़ारा है या हमने दूसरों के लिए समस्याएं पैदा किए थे? क्या हम जवानी के इस दौर में दूसरों के लिए भलाई का एक स्रोत थे या हमने लोगों को नुकसान पहुंचाया है? किशोरावस्था हमारे जीवन का एक बहुत ही क़ीमती हिस्सा है। जीवन के इस चरण में हमारे पास दूसरों को देने के लिए बहुत कुछ होता है। अगर जीवन के इस लम्हे को हम सही ढंग से बिताते हैं तो हमारा जीवन एक सुखद आशीर्वाद बन सकता है।

 

God’s Mercy and Compassion  अल्लाह की रहमत और मेहरबानी
Sadia Dehlvi

शैख इब्ने अल-अरबी का मानना ​​था कि सभी मनुष्यों के साथ सम्मान और दया का प्रदर्शन किया जाए और उनके साथ नेक नीयती के साथ मामले अंजाम दिए जाएं। उनका कहना है कि, "सभी मनुष्यों के साथ समान व्यवहार करो चाहे वह राजा हो या भिखारी, छोटा हो या बड़ा, यह जान लो कि सभी मानव जाति एक शरीर की तरह है और लोग इसके सदस्य हैं। एक शरीर अपने जुज़ईयात के बिना पूरा नहीं। विद्वानों का अधिकार सम्मान है और जाहिलों का अधिकार सही सलाह है, लापरवाह व्यक्ति का अधिकार है कि उसे जागरूक किया जाए और बच्चों का अधिकार है कि उनके साथ सहानुभूति और प्यार का मामला हो। अपने परिवार और दोस्तों के साथ अपने कर्मचारियों के साथ, अपने पालतू जानवरों के साथ और अपने बगीचे के पेड़ पौधों के साथ अच्छा व्यवहार करो। उन्हें खुदा ने तुम्हारी अमानत में रखा है और तुम अल्लाह पाक की अमान में हो। हमेशा हर इंसान के प्रति प्यार, उदारता, सहानुभूति, अनुग्रह और सुरक्षा का प्रदर्शन करो। "

 

भारत वर्ष 2050 तक दुनिया में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाला देश हो जाएगा और इस मामले में वह सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया को पीछे छोड़ देगा जबकि उस समय तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आबादी हिंदुओं की हो जाएगी। प्यू रिसर्च सेंटर द्वारा गुरुवार को जारी धर्म से संबंधित अनुमानों के आंकड़ों के अनुसार दुनिया की कुल आबादी की तुलना में मुसलमानों की आबादी तेजी से बढ़ने का अनुमान है और हिंदू और ईसाई आबादी वैश्विक जनसंख्या वृद्धि की गति के अनुसार रहेगी।

 

The Prophet Muhammad—A Great Humanitarian  पैगम्बर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम – एक महानतम मानवता पसंद
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

पैगम्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के द्वारा सिखाए गए महत्वपूर्ण पाठ में से एक यह है कि हमें दूसरों के बीच फूलों की तरह रहना चाहिए कांटों की तरह नहीं। यहूदी और मुसलमान मदीना में एक साथ शांति से रहते थे। पैगम्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने स्वतंत्र रूप से उन्हें अपने धर्म का पालन करने की अनुमति दे रखी थी। इसके अलावा पैगम्बर मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने अपने अनुयायियों को बताया कि अगर किसी ने किसी भी तरह किसी गैर मुस्लिम [जिम्मी] की हत्या या उनके साथ बुरा व्यवहार किया तो वह जन्नत की खुशबू नहीं सूंघ सकेगा और नबी सल्लाल्ल्हू अलैहि वसल्लम क़यामत के दिन खुद उस जिम्मी (गैर मुस्लिम) का पक्ष लेंगे। [10] हुजुर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमेशा ईसाइयों, यहूदियों और मुशरिकों के साथ शांति की इच्छा व्यक्त की,

 

Maulana Wahiduddin Khan on Anti-Muslim Sentiments  इस्लाम विरोधी भावनाओं पर मौलाना वहीदुद्दीन खान की प्रतिक्रिया
Maulana Wahiduddin Khan for New Age Islam

प्रश्न: हाल के वर्षों के दौरान कई देशों में मुस्लिम विरोधी भावनाओं में वृद्धि हुई है। उदाहरण के लिए पश्चिम में मुसलमानों को रेस्तरां से रोके जाने और उन्हें शारीरिक और मौखिक रूप से यातना दिए जाने के मामले सामने आए हैं। गलत शक के आधार पर मुसलमानों को विमान से उतरने के लिए कहा गया। मुस्लिम महिलाओं को नकाब पहनने की वजह से उनको नौकरी से निकाला जा रहा है। क्षेत्रीय गैर मुस्लिम अपने क्षेत्रों में मस्जिद निर्माण के प्रस्ताव के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, आदि। आपको क्या लगता है कि उनके बढ़ते मुस्लिम विरोधी भावनाओं के कारण क्या हैं?

 

तस्व्वुफ (सूफीवाद) दुनिया को शांति, अहिंसा, प्रेम और भाईचारे का पाठ देता है। सूफियों ने पूरी दुनिया को प्यार का संदेश दिया है। उनके भाईचारे व प्रेम का संदेश आज भी सार्थक है जो दिलों को जोड़ने का काम कर सकता है। तस्व्वुफ की सबसे बुनियादी शिक्षा है कि इंसान अपने निर्माता और मालिक से ऐसा आध्यात्मिक रिश्ता जोड़े कि उसे अपने दिल के आईने में सारी दुनिया का तस्वीर दिखने लगे। इस तरह दिल से दिल के तार जुड़ते चले जाएंगे और कोई भी इसके लिए गैर और पराया नहीं रह जाएगा।

 

Attack on Qalandar Shrine  महान सुफी शाहबाज़ क़लन्दर के मज़ार पर हमला स्वयं मुसलामानों के भटके होनें का प्रमाण
Arshad Alam, New Age Islam

पाकिस्तान की समस्या यह है कि वहां मुस्लिम समाज के भीतर बड़े पैमाने पर असहिष्णुता और घृणा पाई जाती है। वहां शिया और सुन्नी और यहां तक कि खुद सुन्नियों के बीच जबरदस्त दुश्मनी है, मुसलमान इस्लाम की अन्य व्याख्याओं को गवारा नहीं करते। इसलिए सल्फियों को बरैलवियों के साथ जबरदस्त परेशानी है जिसका जवाब वह उसी ऊर्जा के साथ देते हैं। क्या यह सच नहीं है कि हजारों देवबंदी मदरसों के अंदर युवा मन में यह जहर घोला जा रहा है कि बरैलवी इस्लाम के दुश्मन हैं और क्या यह भी सच नहीं है कि बरैलवी मदरसों के अंदर नव युवकों को देवबंदियों से नफरत करने की शिक्षा दी जाती है।

 

Murderous Sectarianism in Islam  इस्लाम में जानलेवा सांप्रदायिकता: सल्फ़ी उलेमा शाहबाज कलंदर के मजार पर नरसंहार की सिर्फ निंदा ही नहीं बल्कि इसके पीछे वैचारिक मंशा का भी मुकाबला करें
Sultan Shahin, Founding Editor, New Age Islam

सऊदी अरब में वहाबी सल्फ़ी पंथ के संस्थापक मुहम्मद बिन अब्दुल वहाब (1792-1703) ने सभी बुद्धिजीवीयों और सूफी मुसलमानों को मुशरिक ठहराते हुए "वाजिबुल क़त्ल" करार दियाl  कशफुश शुबहात के अंदर एक लंबी बातचीत में उन्होंने इस बात का खुलासा किया है कि आखिर कियों सभी मुसलमान एक अल्लाह पर ईमान रखने के अपने दावे के बावजूद मुशरिक हैं और जिनका रक्त और संपत्ति वहाबी मुसलमानों के लिए हलाल (मुबाह) है। वह अपनी बातचीत के अंत पर लिखते हैं: "... आप अब इस बात को समझते हैं कि उन लोगों (गैर वहाबी मुसलमानों) के तौहीद (अल्लाह के एक होनें) को स्वीकार करना उन्हें मुसलमान नहीं बनाता तो, तथ्य यह है कि खुदा के अलावा किसी (नबी और सूफी बुजुर्गों) से उनका शफाअत की उम्मीद रखना उन्हें इस बात का हकदार बना देता है कि उन्हें मार डाला जाए और उनकी संपत्ति लूट ली जाए।"-----

 

The Self-Proclaimed ‘Caliphate’ of Daesh or ISIS  खिलाफत ए राशदा के खिलाफ आधुनिक खारजी संगठन आईएसआईएस की स्वयंभू ‘खिलाफत’
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

दुनिया भर में कुछ ऐसे भी लोग हैं जो सोशल मीडिया पर ज्ञान के नाम पर अज्ञानता, ना समझी और रूढ़िबद्धता के ऐसे सबक पढ़ते पढ़ाते दिखाई देते हैं कि इस प्रकाशित युग में उनके ज्ञान और कौशल पर अफसोस का हाथ मलना पड़ता है। और कुछ ऐसे भी हैं जो आईएसआईएस और इस जैसी अन्य संगठनों के बुरे कार्यों को आधार बनाकर दुनिया भर के मुसलामानों को पृष्ठ भुमि से मिटा देने के नापाक ईरादे की ओर बढ़ रहे हैं और केवल यही नहीं बल्कि इस्लाम और मुसलमानों के पारंपरिक दुश्मन से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो रहे हैं। वह आईएसआईएस और इस जैसे संगठनों को तर्क और दलील बनाकर खुलेआम इस्लाम और खिलाफते राशदा का मजाक बना रहे हैं, महान इस्लामी हस्तियों को बदनाम कर रहे हैं और अपने तमाम उपायों के जरिए कमजोर ईमान वाले मुसलमानों को बिगाड़ने में सफल भी हो रहे हैं।

 

Every Good Deed is Valued near Allah  हर अच्छा काम अल्लाह के नजदीक मूल्यवान है
Maulana Asrarul Haq Qasmi

इस्लाम ने अपने मानने वालों का प्रशिक्षण ऐसा किया है कि वह अच्छे कर्मों के खुद भी आदी हो जाएं और समाज में इसे फैलाने का भी कारण बनें। यही कारण है कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपने साथियों को ऐसे कामों पर उभारने के लिए खुद भी इन कार्यों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते थे और उन्हें हिदायत करते थे। कभी कभी उन्हें रग़बत के लिए पिछले कौमों के नेक लोगों के किस्से भी सुनाते थे। सहाबा रज़िअल्लाहु अन्हुम भी समय समय पर आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से पूछा करते थे कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम! कौन सा कर्म अल्लाह के नज़दीक इनाम वाला और अच्छा है और अवसर के हिसाब से प्यारे पैगम्बर उन्हें अलग जवाब दिया करते थे।

 

जहां एक तरफ आज का आधुनिक समाज यह तय कर पाया है कि मानवाधिकार हैं क्या? मानवाधिकार की परिभाषा क्या है? और इन्हें किन सिद्धांतों के तहत तय किया जाना चाहिए? वहीं दूसरी ओर सूफीवाद इस समस्या को सदियों पहले हल कर चुका है? सूफीयों की नज़र में यह एक मुख्य समस्या है और इसके नियम अल्लाह की तरफ से ही तय कर दिए गए हैं।

Deoband- Bareilly Unity: Cosmetic and Dangerous  देवबंदी- बरैलवी गठबंधन एक खतरनाक दिखावा
Sultan Shahin, Founding Editor, New Age Islam

सूफियों और बरैलवियों के साथ अपनी एक सदी पुरानी फूट को खत्म करने की देवबंदियों  की यह कोशिश यादगार हो सकती थी। लेकिन उन्होंने मात्र मुस्लिम पर्सनल लॉ में किसी भी परिवर्तन से लड़ने के लिए यह गठबंधन किया था। इससे केवल यही निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि देवबंद केवल भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ जहाँ तक हो सके मुसलमानों का एक बड़ा मोर्चा स्थापित करने और नेतृत्व करने की कोशिश कर रहा है। इससे यह ज्ञात है कि हाल के दशकों में सऊदी पेट्रो डॉलर के आधार पर वहाबियत को बढ़ावा देने के बावजूद अभी भी देवबंदी पैरोकार बहुत कम हैं। कुल मिलाकर अभी भी भारतीय मुसलमान सूफीवाद पर ही विश्वास करते हैं। हालांकि, केवल देवबंद ही नहीं है जो केवल राजनीतिक कारणों से सूफी बरैलवियों के साथ गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहा है। बल्कि मौलाना तौक़ीर रज़ा बरैलवी ने भी अपने देवबंद यात्रा में कहा था कि: "हमें अपने धार्मिक (सांप्रदायिक) मान्यताओं पर कायम रहते हुए अपने साझा दुश्मन से लड़ने के लिए एकजुट होना चाहिए, यही एकमात्र रास्ता है।"

 

आप सल्लललाहु अलैहि वसल्लम कदम कदम पर अपने साथियों के दिलदारी का ख्याल रखते थे, गजवा ए हुनैन के बाद जब माले ग़नीमत वितरण के संबंध में अंसार में से कुछ युवकों को शिकवा पैदा हुआ तो आपने उन्हें अलग जमा किया और ऐसा प्रभावशाली उपदेश दिया कि उनकी दाढ़ी आंसुओं से तर हो गईं, आप इस अवसर पर जहां अंसार मदीना में इस्लाम के परोपकार का उल्लेख किया, वहीं अंसार के परोपकार को भी खुले दिल से स्वीकार किया और अंत में फरमाया: क्या तुम्हें यह बात पसंद नहीं है कि लोग बकरियां और ऊंट लेकर जाएं और तुम अपने नबी को कजावह में लेकर जाओ? अगर हिजरत न होती तो मैं अंसारी में पैदा हुआ होता, तो अगर लोग एक वादी में चले तो मैं उस वादी में चलूँगा जिस में अंसार चलें, मेरे लिए अंसार की स्थिति उस कपड़े का है, जो ऊपर पहना जाता है। (बुखारी,अनअब्दुल्लाह इब्ने ज़ैद, अध्याय,गज़वतुत्ताईफ हदीस संख्या: 4330)

 

मनुष्य आम तौर पर अपने बुजुर्गों से झुक कर मिलता और तवाज़ो अपनाता है, अक्सर यह झुकाव और बिछाव में धर्म, भाषा और क्षेत्र का अंतर भी बाधा नहीं बनता, उसी तरह इंसान छोटों और बच्चों के साथ स्नेह और प्यार से पेश आता है, इसमें भी धर्म, क्षेत्र, भाषा का कोई अंतर नहीं होता, यह मानव स्वभाव का हिस्सा है, जैसे फूल को देखकर इंसान को उसे देखने और सूंघने की रूचि होती है, साथ ही बच्चों को देखकर दिल में करुणा का भाव उभरता और उससे प्यार करने को दिल चाहता है, मगर इंसान के व्यवहार और मिज़ाज का परीक्षा तब होता है, जब वह अपने दोस्तों और साथियों के साथ हो, विशेषकर ऐसी स्थिति में जब कि अल्लाह ने उसे अपने हम उम्रों और समकालीन लोगों  के मुकाबले उच्च स्थान व मर्तबे से नवाज दिया हो, जो लोग घटिया होते हैं, वे ऐसे अवसरों को अपनी बड़ाई की अभिव्यक्ति और दूसरों को नीचा दिखाने के लिए इस्तेमाल करते हैं।

 

Suicide Attacks Are Categorically Forbidden in Islam  आत्मघाती हमला सभी परिस्थितियों में हराम है: कुरआन और हदीस की रौशनी में
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

ऊपर कुरआनी आयतों और कई हदीसों का अध्ययन करने के बाद एक सही मुसलमान जिसे कुरआन के बारे में कोई संदेह नहीं है और जो हदीस की हुज्जियत पर विश्वास रखता है वह कभी भी आत्मघाती हमलों का औचित्य नहीं रख सकता। वह कभी भी आईएस द्वारा किए गए आत्मघाती हमलों का औचित्य किसी भी मामले में पेश नहीं कर सकता। एक मुसलमान जिसे अल्लाह और उसके प्यारे रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के प्यार की मिठास नसीब हुई हो वह हमेशा आत्मघाती हमले को अवैध व हराम ही समझेगा। एक सही मुसलमान खुद को विस्फोट से उड़ा कर अपनी इसी जीवन को नष्ट नहीं कर सकता। वह आत्मघाती हमलों के लिए किसी दूसरे मुसलमान को नहीं उभारा सकता। अगर कोई यह हराम कार्य करता है तो वह नरक में सजा का हकदार होगा और हर उस रास्ते से भटक जाएगा जो अल्लाह और उसके प्यारे नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के करीब का कारण है।

Why Islam Needs a Reformation Now  इस्लाम में अब बदलाव की ज़रुरत क्यों
Sultan Shahin, Founding Editor, New Age Islam

सऊदी अरब अपनी जमीन पर मंदिर या चर्च बनाने की अनुमति नहीं देता। कुरान की शिक्षा अगर किसी ज़ेहाद की अनुमति देती है तो वो सऊदी अरब के खिलाफ होनी चाहिए ताकि सऊदी अरब को बाध्य किया जा सके कि वह दूसरे धर्मों के धार्मिक स्थल को अपने यहाँ स्वीकृति दे। इस्लाम के आगमन के 13 सालों बाद जब मुसलमानों को खुद की रक्षा के लिए हथियार रखने की इजाजत दी गयी थी तो वह वास्तव में धर्म की रक्षा के लिए थी, केवल मुसलमानों या मुस्लिम धर्म की के लिए नहीं। कुरान के शब्दों में (२२:40) “अगर अल्लाह ने अलग-अलग तरह के लोगों को नियंत्रित न किया होता तो मठ, चर्च, उपासना स्थल और मस्जिद जहां-जहां ईश्वर की भरपूर पूजा की जाती है, उन्हें बिलकुल ही तबाह कर दिया जाता।“

Eid-e-Milad-un-Nabi an Important Festival for Various Sects of Islam  मीलाद उन-नबी इस्लाम धर्म के मानने वालों के कई वर्गों में एक प्रमुख त्यौहार है।
Syed Imteyaz Hasan

मिलाद-उन-नबीमिलाद-उन-नबी, इस्लाम के मानने वालो के लिए सबसे पाक़ त्योहार माना जाता है| मिलाद-उन-नबी का अर्थ दरअसल इस्लाम के प्रमुख हज़रत मोहम्मद के जन्म का दिन होता है | मिलाद शब्द की उत्पत्ति अरबी भाषा के 'मौलिद' शब्द से हुई है| मौलिद शब्द का अर्थ 'जन्म' होता है और नबी हज़रत मोहम्मद को कहा जाता है | इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार मिलाद-उन-नबी का त्योहार 12 रबी अल-अव्वल के तीसरे महीने में आता है |

 

Islam of a Fundamentalist Like Zakir Naik is Not Our Islam  जाकिर जैसे कट्टरपंथियों का इस्लाम हमारा इस्लाम नहीं!
Ghulam Rasool Dehlvi

देश में इस्लाम के भीतर इधर एक कट्टर सलाफी विचारधारा उभरी है, जिसके उपदेशक ऐसी बातें कह रहे हैं जो इस धर्म के उदारवादी मूल्यों से मेल नहीं खाती। ऐसे ही एक धर्मोपदेशक हैं केरल के सलाफी धर्मगुरु शम्सुद्दीन फरीद, जो कहते हैं कि मुसलमानों को गैरमुस्लिमों के त्योहारों और धार्मिक पर्वों में भाग नहीं लेना चाहिए। माना जाता है कि मालाबार के लापता मुस्लिम युवा उन्हीं की शिक्षा से प्रभावित हैं। कई तथाकथित इस्लामी कार्यक्रमों में नाइक ने सालोंसाल जो काम किया, वही शम्सुद्दीन फरीद भी कर रहे थे। द्वेषपूर्ण भाषण देने पर कसारगोड पुलिस ने हाल में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया है।

Poetry, Music is Forbidden in the Real Islam or in It's Fundamentalist Versions  काव्य, गीत-संगीत हकीकी इस्लाम में हराम है या इसके कट्टरपंथी संस्करणों में?
Abhijeet, New Age Islam

पैगंबरे-इस्लाम की सीरत में दसियों ऐसे प्रमाण मौजूद हैं जो साबित करतें हैं कि उन्हें न तो गीत-संगीत, काव्य और शेरो-शायरी से तकलीफ थी और न ही उनको खुशी मनाने के लिये इन तरीकों को चुनने पर ऐतराज़ था। रसूल जब मक्का से हिजरत कर मदीना पहुंचे तो मदीना की औरतें अपने-अपने मकानों की छतों पर चढ़ गई और आने की खुशी में झूम-झूम कर अश्आर पढ़ने लगी, छोटी बच्चियाँ दफ बजा-बजा कर गीत गाने लगीं। मज़े की बात है कि झूम रहीं और जश्न मना रही लड़कियों को नबी ने मना नहीं किया ये तुम लोग क्या जाहिलाना काम कर रही हो बल्कि खुश होकर उनसे पूछा कि ऐ बच्चियों, क्या तुम मुझसे मुहब्बत करती हो? लड़कियों ने हाँ में जबाब दिया तो खुश होकर नबी ने उनसे फरमाया, मैं भी तुम सबसे बेइंतेहा मुहब्बत करता हूँ।

Maulana, Why do you not Tell These Things to Your Ummah  मौलाना ये सब अपनी उम्मत को क्यों नहीं बताते?
Abhijeet, New Age Islam

रसूल साहब के सीरत की ये धटना तलाक को लेकर उनकी सोच को प्रतिबिंबित करती है। उनकी बेटी एक काफिर के निकाह में थी और शरीयत के अनुसार मुसलमान की बेटी किसी काफिर के निकाह में नहीं रह सकती तब भी नबी ने अबुल आस से अपनी बेटी को तलाक़ देने को नहीं कहा उल्टा जब उनके दामाद ने भड़काये जाने के बाबजूद बीबी जैनब को तलाक देने से मना कर दिया था तब नबी ने उनके बेहतरीन दामाद होने की बात कही थी।

Sultan Shahin Raises Triple Talaq Issue  सुल्तान शाहीन  ने UNHRC में  ट्रिपल तलाक के मुद्दे को उठाया , उन्होने मुसलमानों से कहा कि वे इस्लामी थियोलाजी पर गंभीरता से पुनर्विचार करें
Sultan Shahin, Founding Editor, New Age Islam

दक्षिण एशिया के एक मुस्लिम देश में हजारों हिंदू और ईसाई लड़कियों को , जिनमें से बहुत सी18 वर्ष की आयु से कम की हैं उनकाअपहरण कर लिया गया है, उन्हें जबरन मुसलमान बनाया गया हैऔर फिर उनकी "शादी"अपहणकर्ताओं से कर दी गई है। एक मध्य पूर्वी देश में, अदालतें, 9 साल की उम्र  वाली छोटी लड़कियों के विवाह की अनुमति देती हैं और उन्हें अपने विवाह को शारीरिक संबंध स्थापित करके पूर्ण करने और अपने पति के साथ रहने को मजबूर करती हैं।

Reviving a Sunnah? How ISIS Justifies Slavery?  आईएसआईएस के लोग गुलामी को कैसे सही ठहराते है? क्या वे एक सुन्नत को फिर से जीवित कर रहे हैं?
Arshad Alam, New Age Islam

2014  में जब ‘संजर’ फतह हुआ तो आईएसआईएस ने विशेषकर शिया और यज़ीदी समुदाय से कई महिलाओं और बच्चों को गिरफ्तार कर लिया. दाएश (आईएसआईएस) ने उन लोगों पर जो हैबतनाक अत्याचार किए, दुनिया उनकी दिल दहला देने वाली कहानियों से परिचित है. ‘संजर’ के जीत जाने के बाद पैदा हुए मानवीय संकट पर ध्यान केंद्रित करने के बजाए पश्चिमी मीडिया ने इस बात की जांच में अधिक रुचि दिखाई कि आईएसआईएस यौन गुलामी का वह बाजार गर्म करने में किस तरह लगा हुआ है, जिसमें यज़ीदी महिलाओं की खरीद-बिक्री जारी है।

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  • some good news from morocco." Death penalty for apostates is really an Old Testament subject which was stolen....
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • Poor Hats Off! As if calling it 'pop psychaitry' would hide the fact that he is in denial.
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • Killing of Hindu atheists as well as Muslim atheists must stop. Any scriptural verses ....
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • Very pertinent and rightful plaint!'
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • A bold truthful article!
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • wow. Worth reading . These beautiful lines from Maulana sahab is a great treat for secular and ...
    ( By Nikrun )
  • CORRECTION: In my last post I meant, "Martin Luther did say those things and yet Protestants....
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • A ban on triple talaq would be the appropriate step to take at this time. Our laws must....
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • Dear friends, I suggest all to read JIHAD- A Legacy of Forced Conversion, Imperialism۔۔۔
    ( By Surya Prakash Samidala )
  • Don't compare Beef Ban with blasphemy Mr Shamim Siddiqui....There is also meat....
    ( By Arnab Pal )
  • 3/22/2017 7:46:27 AM hats off! the fact of the matter is that the Holy Qur'an (not the koran) refers to non-muslims as kuffar. as...
    ( By hats off! )
  • l ماشاء اللہ! آپ کی حالیہ اشاعت ‘‘مصباح ادب’’ موصول ہوئی۔ اللہ زیادہ سے زیادہ خدمت دین کی توفیق بخشے(آمین)۔ چونکہ آپ سے میرے تعلقات بہت ...
    ( By Mufti Arshad Jamaal )
  • @Polumetla Kumar, Sir are you talking about today America and Europe countries who are talking about PEACE.' ...
    ( By Naeem Ahmed )