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No Country for Rohingyas  रोहंगिया मुसलामानों के लिए पृथ्वी की विशालता तंग
Arshad Alam, New Age Islam

शायद अंतिम समाधान को व्यावहारिक रूप दे दिया गया हैl उस भूमि पर नहीं जहां यह नाज़ी विचार पैदा हुआ था बल्कि मयान्मार के दूर दराज इलाके मेंl एक बड़ी मुस्लिम आबादी पर आधारित सबसे गरीब राज्य को फ़ौजी दस्ते वीरान कर रहे हैं और पुरी दुनिया खामोशी के साथ बैठ कर तमाशा देख रही है जैसे कि दुनिया में कुछ हो ही नहीं रहा हैl

 

UAE Fatwa Council to Fight against Rogue Fatwas  संयुक्त अरब अमीरात फतवा काउंसिल आतंकवाद और चरमपंथ को बढ़ावा देने वाले फतवों का मुकाबला करने के लिए प्रतिबद्ध

शैख़ इब्ने बैय्यह जो (Forum for Promoting Peace in Muslim Societies) के चेयरमैन भी हैं, उन्होंने कहा कि काउंसिल “समाज, नगर और पुरे विश्व की सुरक्षा को खतरे में डालने वाले भ्रष्ट फतवों और विनाशकारीप्रभाव से देश की सुरक्षा करने का पूरा प्रयास करेगी”l उन्होंने कहा कि “काउंसिल का किरदार उलेमा के लिए इस मुबारक देश में एक महत्वपूर्ण कदम होगा”l

 

Islamic Concept of Tolerance—an Essential Prerequisite for Peaceful Coexistence  सहिष्णुता की इस्लामी अवधारणा - शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के लिए एक अनिवार्य शर्त
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

हमारी मुस्लिम बिरादरी पर ज़रूरी है कि सबसे पहले हम अपनी ज़िन्दगी के सभी क्षेत्रों में इस्लाम के सहन करने की अवधारणा को विकल्प करें और फिर इसके बाद दूसरी बिरादरियों को भी सहिष्णुता की दावत देंl इसके लिए मैं सभी मुस्लिम बुद्धी जीवियों से प्रार्थाना करता हूँ कि वह सहिष्णुता के मूल्यों और उसकी अहमियत पर एक ख़ास निसाब तैयार करें और अपने मदरसों, स्कूलों, कालिजों, युनिवर्सिटियों और धार्मिक या सेकुलर संस्थाओं में इसकी शिक्षा देंl गैर मुस्लिम संगठनें भी अनिवार्य रूप से ऐसा ही एक पाठ्यक्रम तैयार करें ताकि संगठित तौर पर हमारे समाज और देश के सभी वर्गों में सहिष्णुता की जड़ें मजबूत हो सकेंl

 

Syed Ahmed Khan: When Will We Stop Idolizing Him and Start Engaging With His Ideas?  सैयद अहमद खान: कब हम उनसे अकीदत का इज़हार बंद करके उनके विचारों पर चर्चा शुरू करेंगे?
Arshad Alam, New Age Islam

इनमें सैयद अहमद खान के विचारों पर कोई आलोचनात्मक वार्तालाप करने का प्रयास नहीं किया जाता हैl हमारे समाज में कोई भी इस बात पर गौर नहीं करता कि क्यों दो सौ साल बाद भी हम उन्हीं समस्याओं में उलझे हुए हैं जिनका सामना सैयद अहमद को उनके जीवन में थाl इस्लाम और आधुनिकता के साथ संबंध, शिक्षिक पिछड़ापन और मुस्लिम समाज के अन्दर रूढ़ीवाद के प्रभाव यह वह समस्याएँ हैं जिनका सामना हमें आज भी हैl

 

इस्लाम ने मुसलामानों को अपनी रोजाना की ज़िंदगी के सभी मामलों में मुसलामानों को एतेदाल पसंदी यानी मॉडरेशन की तालीम दि हैl उन्हें शैतान को खुश करने वाली किसी भी किस्म की इन्तेहा पसंदी से बचना चाहिए जो उन्हें सीधी राह से भटका देता हैl एतेदाल पसंदी और तवाजुन की तालीम के साथ मुसलमान इन्तेहा पसंदी की बढ़ती हुई लहरों का मुकाबला कर सकते हैं जिनसे मुसलामानों और गैर मुस्लिमों दोनों को खतरा हैl

 

Muslims Must Seize Any Opportunity to Reform Their Madrasas  मुसलामानों को अपने मदरसों के सुधार के लिए हर एक मौक़ा अपनाना चाहिए
Arshad Alam, New Age Islam

इस बात से सभी परिचित हैं कि मौजूदा स्थिति संतोषजनक नहीं हैl इन संस्थाओं में जो शिक्षा दी जाती है मध्यकालीन और पुरानी है; वहाँ तर्क (मंतिक) की किताबें पढ़ाई जाती हैं जिन पर छात्र कई कई घंटे लगाते हैं लेकिन इससे उन्हें कुछ भी प्राप्त नहीं होताl एक समय था जब मदरसों से ना केवल फिकही विशेषज्ञों बल्कि बेहतरीन फलसफी, गणितज्ञ और यहाँ तक कि बेहतरीन वास्तुकार भी पैदा होते थेl लेकिन 1857 के बाद मदरसों में शिक्षा का दायरा केवल धार्मिक शिक्षा तक ही सीमित हो कर रह गयाl

 

Understanding Pranab Mukherjee’s Speech as an Answer to Mohan Bhagwat is Wrong  प्रणब मुखर्जी के भाषण को मोहन भागवत का जवाब समझना गलत है
Arshad Alam, New Age Islam

अगर प्रणब मुखर्जी कोई अंतर पैदा करना चाहते तो वह ख़ास तौर पर मुसलामानों और दलितों के कत्ल ए आम के बारे में जरुर कोई बात करतेl आज जो गलत है उसे स्पष्ट ना करके और इस बात का खुलासा ना करके कि किस तरह उनका संबंध अतिवादी हिन्दू विचार से हैl उन्होंने आर एस एस को एक विशेष अंदाज़ में औचित्य प्रदान किया हैl जो दौर हम देख रहे हैं इस जैसे परेशान करने वाले दौर में बुराई का नाम ना लेना उसे अनदेखा करने के बराबर हैl

 

And the Taj Stands Tall  और ताज अभी भी ऊंचा है
Arshad Alam, New Age Islam

कुछ बातें ऐसी हैं जिनसे मुझे ऐसा लगता है कि हमने ताज पर आखरी बात नहीं सुनीl मुख्यमंत्री ने जो किया है वह केवल अस्थायी तौर पर मददगार हैl सबसे बड़ी बात यह है कि उन्होंने ताज महल की असल के बारे में उन मामलों का अध्याय बंद नहीं कियाl उन्होंने थोड़ी देर के लिए इस पर बहस को निलंबित कर दिया हैl वह कुछ ऐसे दुसरे एम एल ए के साथ आए जिन्होंने इस प्रभाव को मजबूत करने की कोशिश की कि असल में ताज महल एक शिवमंदिर थाl ऐसी बातों को रद्द करने के लिए योगी ने कुछ भी नहीं कियाl उनकी खामोशी ने समय में थोड़ी गुंजाइश पैदा कर दी है लेकिन इससे पहले अधिक समय बीते उन्हीं की पार्टी का कोई और मेंबर फिर से ऐसी फ़ालतू बात करना शुरू कर देगाl

 

Darul Uloom Deoband Against The ‘Erroneous’ Thoughts Of The Tablighi Jama’at  दारुल उलूम देवबंद तबलीगी जमाअत के 'गलत' सिद्धांतों के खिलाफ
Ghulam Rasool Dehlvi, New Age Islam

हैरत की बात है कि दारुल उलूम देवबंद ने सौ वर्षीय इतिहास में पहली बार अपनी सैद्धांतिक शाख – तबलीगी जमाअत पर अपना दरवाज़ा बंद कर दिया हैl मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार तबलीगी जमाअत पर दारुल उलूम की “चार दिवारी” के अन्दर किसी हर तरह की गतिविधि अंजाम देने पर प्रतिबंध लगा दिया गया हैl 10 अगस्त को बड़े पैमाने पर उर्दू प्रेस में प्रकाशित होने वाले एक रिपोर्ट के अनुसार हाल ही में मदरसा प्रशासन ने एलान किया है कि अगर किसी भी छात्र को किसी भी रूप में तबलीगी जमाअत के तहरीक में लिप्त पाया गया तो उस पर दंडात्मक कार्यवाही की जाएगीl

 

The Exigency of Muslim Reform  मुस्लिम सुधारों की अत्यधिक आवश्यकता
Syed N Asad, New Age Islam

अधिकतर मुस्लिम बिरादरियों में सदैव इसी प्रश्न को केन्द्रीय हैसियत प्राप्त होती है कि इस्लाम की रिवायत व दिनचर्या के लिए एक तार्किक और अमली दृष्टिकोण विकल्प करने के आवश्यकता है या यह संभव है भी कि नहींl इस प्रश्न पर हमारे सामने विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रिया आती हैंl जैसे परम्परागत शरई नियम पर अमल करने वाले अधिकतर मुसलमान इस बात के कायल हैं कि कभी भी इसमें सुधार नहीं की जा सकती क्योंकि वह इस्लाम को एक कामिल और मुकम्मल जीवन प्रणाली मानते हैंl

 

एर्दोगान से पहले तुर्की का हाल यह था कि वहाँ जो भी प्रधानमंत्री चुना जाता, फ़ौजी आमरीन पश्चिमी शक्तियों की शह पर उसे बर्ख़ास्त करके फांसी पर चढ़ा देते थेl अर्बकान ताज़ा उदहारण में से एक हैंl राष्ट्रपति एर्दोगान ने बग़ावत की इस रिवायत का खात्मा किया और देश में लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा दियाl सैन्य विद्रोह को कुचल दियाl धार्मिक स्वतंत्रता: अता तुर्क के दौर में इस्लामी प्रतीकों पर प्रतिबन्ध लागा दी गई थीl जैसे कोई मुस्लिम महिला हिजाब नहीं बाँध सकती थी, स्कूलों में लड़कियों के लिए स्कर्ट पहनना अनिवार्य कर दिया गया थाl हिजाब बाँधने पर जुर्माना देना पड़ता थाl एर्दोगान ने आकर इस जब्र का अंत किया और देश में धार्मिक स्वतन्त्रता का माहौल स्थापित कियाl

 

Kashmir Is Too Diverse, Too Multicultural A Land To Turn Into A Radical Islamist State  कश्मीर एक बहुत ही विविध और बहु सांस्कृतिक राज्य है और आसानी से एक कट्टरपंथी इस्लामी राज्य में बदल सकता है
Ghulam Rasool Dehlvi, New Age Islam

अब वह समय आ गया है कि मुख्यधारा कश्मीरी जनता अपनी खोई परंपरा कश्मीरियत की प्राप्ती पर ध्यान केंद्रित करें जो कि सूफियों की इस धरती पर ऋषियों और सूफियों की परंपरा का सबसे बड़ा उपहार है। दरअसल कश्मीर काफी विविध और बहुसांस्कृतिक राज्य है और आसानी से अतिवादी इस्लामी राज्य में बदल सकता है। इसलिए, ऐसा मालूम होता है कि घाटी में एक लंबी और कठिन राजनीतिक संकट के बाद गृहमंत्री के इस दौरे से हालात सामान्य हो जाएंगे।

 

Muslim Jurists Are Wrong, Husbands Cannot Beat Wives  मुस्लिम फुकहा का स्टैंड गलत, पति पत्नियों को नहीं मार सकते
T.O. Shanavas MD, New Age Islam

खुलासा यह है कि बीवियों की तरफ से नुशुज़ की स्थिति में शौहर दावेदार, फैसल और सज़ा देने वाले नहीं बन सकतेl इस मामले में हकीकत क्या है इसका निर्धारण करना केवल न्यायालय का काम हैl अगर तम्बीह करने, बिस्तर अलग करने, अलामती ज़र्ब लगाने या उचित तरीके से सुलह से काम नहीं बन्दा तो उस स्थिति में शौहर और बीवी की तरफ से सहीह इक़दाम ए एहसान के साथ तलाक देना हैl

 

The Jinnah Redux in AMU; This Time as a Farce  अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में जिन्ना पर एक बार फिर हास्यास्पद हंगामा
Arshad Alam, New Age Islam

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय प्रशासन अब तक उन छात्रों के बारे में चुप है जिन्हें विश्वविद्यालय के विभिन्न सांस्कृतिक कलबों से निलंबित कर दिया गयाl एफ आई आर एक खबर की तरह फ़ैल गई और सोशल मीडिया पर मुस्लिम बिरादरी की ओर से उन छात्रों के खिलाफ एक ज़बरदस्त प्रतिक्रिया देखने को मिलीl कुछ लोगों ने तो यहाँ तक कह दिया कि उन्हें कुफ्र व इर्तेदाद का मुर्तकिब करार देकर क़त्ल कर दिया जाना चाहिएl बहर हाल वह तीनों छात्र अपने फोन बंद करके अभी छिपे हुए हैं और उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स बंद कर दिया हैl

 

Islamic Postulates of Ijtihad (Rethinking) And ‘Ismah’ (Infallibility)  इज्तेहाद और ‘इस्मत’ का इस्लामी सिद्धांत और जंगे जमल की रौशनी में सहाबा के बीच मतभेद की वास्तविकता भाग-1
Ghulam Rasool Dehlvi, New Age Islam

इस्लामी फिकही कानून के अनुसार अगर किसी मुसलमान के अन्दर इज्तेहाद की सलाहियत मौजूद है तो उसे किसी दुसरे मुजतहिद की पैरवी करना जरुरी नहीं हैl कुरआन और सुन्नत के बाद इस्लामी अहकामात और कानून प्राप्त करने में इज्तेहाद का एक महत्वपूर्ण किरदार हैl शरीअत के पहले दो बुनियादी स्रोत के विपरीत कि जिन का सिलसिला रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की रहलत के साथ ही टूट चुका है, बौद्धिक और रचनात्मक सोच और दीन के मामलों में समकालीन समस्याओं पर गौर व फ़िक्र का अमल मुसलसल इज्तेहादी ही हैl लेकिन इसके मजाज़ केवल वही लोग हैं जो कुरआन व हदीस के नुसुस से सीधे अर्थ और अहकाम प्राप्त करने के काबिल हैंl

 

इस लेख से स्पष्ट रूप से यह बात साबित हो गई कि आज जो इस्लाम को आतंकवाद से जोड़ा जा रहा है यह सरासर अन्याय है...और अगर कोई ऐसा व्यक्ति आतंकवाद करे जो टोपी और कुर्ता पहना हो तो उसे देख कर यह नहीं कहा जा सकता कि मुसलमान आतंकवादी हैं क्योंकि मुसलमान केवल टोपी दाढ़ी रख लेने का नाम नहीं है बल्कि जिसके अन्दर लोगों के खून की हिफाज़त करने का जज़्बा होगा, नाहक कत्ल व गारत को रोकने वाला होगा वह मुसलमान होगा क्योंकि मज़हब ए इस्लाम इसी की तालीम देता है...मैं अंत में स्पष्ट शब्दों में यह कहती हूँ कि जहां आतंकवाद है वहाँ इस्लाम का नाम व निशान भी नहीं हैl

 

The importance of Zikr  ज़िक्र का महत्व
S. Arshad, New Age Islam

दुनिया बनाने वाले का ज़िक्र दुनिया के सभी धर्मों में है और ज़बूर, तौरेत, इंजील और दुनिया की सबसे पुरानी आसमानी किताबें--- वेदों में भी दुनिया बनाने वाले की हम्द व तारीफ़ की गई है और भक्तों या बन्दों को अधिक से अधिक खुदा की हम्द व सना की हिदायत दी गई हैl खुदा के नाम को जपने की रिवायत और भी दुसरे धर्मों में है जैसे मनी चीन धर्म जो प्राचीन ईरान में प्रचलित था और जिसके पैगम्बर मनी थे इसी लिहाज़ से इस मज़हब को मनवी कहा जाता थाl

 

One Who Is Engrossed In God Can Discover Him  जो खुदा की तलाश में सरगरदां है वह उसकी पहचान हासिल कर सकता है
Maulana Wahiduddin Khan

इसके बाद प्रकृति के मज़ाहिर पर नज़र करना, मानवीय इतिहास का अध्ययन करना और अपने नफ्स पर गौर करना और कायनात की हर छोटी बड़ी चीज उसके दिल में एक खुदा का ख्याल पैदा करेगी; इस कायनात की हर चीज उसके जहन को उस हकीकत वह्दहू ला शरीक की तरफ आकर्षित करेगीl वह हर जगह उसकी अजमत का मुशाहेदा करेगाl केवल वही अल्लाह की पहचान एक एक ऐसा तोहफा है जो उन लोगों को अता नहीं किया जाता जो उसके अलावा दूसरी चीजों में भी व्यस्त होंl

 

A Profound Ideological Crisis In The Indian Muslim Community  सांप्रदायिकता: भारतीय मुस्लिम समाज का एक जबरदस्त सैद्धांतिक संकट
Ghulam Rasool Dehlvi, New Age Islam

न्यू एज इस्लाम के फाउन्डिंग एडीटर जनाब सुलतान शाहीन ने अपने एक हालिया लेख में बजा तौर पर यह सवाल उठाया है की : “साम्प्रदायिक सौहार्द यकीनन एक कदर के काबिल उद्देश्य हैl तथापि, इसका उद्देश्य भी अति महत्वपूर्ण हैl एक दुसरे को काफिर कहने वाले वहाबी देवबंदी और सूफी- बरेलवी फिरके अब कुछ महीनों से एकजुट होने की कोशिश कर रहे हैंl लेकिन इसका उद्देश्य क्या है?”..........

 

Is Violence the Only Way Out  क्या हिंसा ही अंतिम रास्ता है?
Mushtaq Ul Haq Ahmad Sikander, New Age Islam

जम्मू व कश्मीर में बंदूक का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं हैl राज्य और सरकार सहित विभिन्न जामातें और संगठन अपने उद्देश्य को हासिल करने के लिए इसका इस्तेमाल करती आ रही हैंl 1931 से ही सशस्त्र बागी जमातें कश्मीर की राजनीति का हिस्सा रही हैंl डोगरा सशस्त्र जमातों नें १९४७ में जब की पुरे उपमहाद्वीप भारत में आग लगी हुई थीl लगभग तीन हज़ार मुसलामानों को क़त्ल किया थाl 1947 से ले कर अब तक कई सशस्त्र संगठन हिंसा के इस्तेमाल से हुकूमत को ताखत और ताराज करने और अपने राजनीतिक उद्देश्यों को हासिल करने की कोशिश कर चुकी हैंl

 

Refutation of Kashmiri Militant Zakir Musa’s Recent Statement  कश्मीरी उग्रवादी ज़ाकिर मुसा का कश्मीर के नरमदलीय मुसलामानों के सर कलम करने वाले हालिया बयान की तरदीद (भाग-2)
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

भारतीय सेकुलरिज्म की खुसूसियत यह है कि यहाँ सेकुलरिज्म का तसव्वुर दुसरे देशों से अलग है और भारतीय रियासत सभी धर्मों को बराबर का दर्जा देती हैl भारत के संविधान में 1976 ई० की 42 वीं संसोधन के अनुसार संविधान के मुकद्दमे में इस बात पर जोर दिया गया कि भारत एक सेकुलर देश हैl हालांकि ना तो भारत के संविधान में और ना ही उसके नियमों में धर्म और राज्य के बीच संबंधो का कोई स्पष्टीकरण पेश किया गया है, तथापि, भारत हर धर्म को स्वीकार करता है और उनके लिए बराबर सम्मान को निश्चित बनाता हैl भारत के शहरियों को पूर्ण स्वतन्त्रता के साथ हिन्दू मत, इस्लाम, ईसाइयत, जैन मत, बुद्ध मत और सिख मत आदि जैसे अपने अपने धर्म पर अमल करने की अनुमति हासिल हैl

 

'Only In the Remembrance of God Is the Solace of Hearts' (Quran13:28)  अल्लाह ही के ज़िक्र में दिलों का सुकून है
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

असल में दिल का इत्मीनान बहुत बड़ी दौलत है जिस किसी को यह हिस्सा मिल जाए वह कामयाब तरीन इंसान है, चाहे वह दूसरों के देखने में कोई मामूली सा गरीब इंसान हो, लेकिन दिल का सुकून उस गरीब इंसान के लिए इतनी बड़ी दौलत और पूंजी ही जिसका एहसास और अंदाज़ा केवल वही कर सकता हैl इसके उलट दुनिया का बड़ा से बड़ा लीडर और अरबपति अगर दिल का सुकून हासिल करने के लक्ष्य से वंचित रहा तो उसकी लीडर शिप या दौलत उसे कभी सफल नहीं बना सकती.....

 

Muslim Zakat: Reigniting the Fire of Camaraderie  इस्लाम में जकात की अवधारणा
Moin Qazi, New Age Islam

यह दृष्टिकोण हज़ारों सालों से मौजूद रहा है की दूसरों की मदद करना एक सार्थक जीवन का भाग है, मुसलामानों के लिए सदका व खैरात उनके अकीदे व मामुलात का बुनियादी पहलु हैl मजहबे इस्लाम में देने का कल्चर एक इबादत की शक्ल में पेश किया गया हैl गरीबों की मदद एक मज़हबी हुक्म हैl इस दृष्टिकोण के तहत कि हर चीज खुदा की तरफ से है और आखिर में सबको खुदा की ही तरफ लौट जाना हैl मुसलामानों को खुदा की नेमतों का अमीन बन कर ज़िन्दगी बसर करने की शिक्षा दी गई हैl

 

Refutation Of Kashmiri Militant Zakir Musa’s Recent Statement  कश्मीरी उग्रवादी ज़ाकिर मूसा का कश्मीर के नरम मुसलामानों के सर कलम करने वाले हालिया ब्यान का रद्द भाग-1
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

भारतीय मुसलामानों को जो मज़हबी आज़ादी हासिल है वह रूहानी तरक्की के हुसूल और तकवा की राह अख्तियार करके अल्लाह और उसके महबूब नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की कुर्बत हासिल करने के लिए काफी हैl प्रश्न यह है कि कश्मीरियों सहित भारतीय मुसलमानों को एलानिया इस्लामी अहकाम व फ़राइज़ अदा करने, तजकिया नफ्स, इस्लाह ज़ाहिर व बातिन, रूहानी मर्तबा हासिल करने और अल्लाह का ज़िक्र करने से कौन रोकता है? इसी तरह इस्लामी रुसुमात व मामुलात पर अमल करने से उन्हें कौन रोकता है?.....

 

Fasting during Ramadan Is a Course of Annual Re-Strengthening  रमज़ानुल मुबारक के महीने में रोज़ा बातिनी शख्सियत को मजबूत करने की एक सालाना मश्क है
Maulana Wahiduddin Khan

रोज़ा खुद को मजबूत बनाने का एक तरीका हैl यह ज़ोह्द व तकवा का एक सूफियाना तरिका है जो इंसान के अन्दर जब्ते नफ्स का जज़्बा पैदा करता हैl और ज़ब्ते नफ्स ही रूहानी ताकत का दुसरा नाम हैl जब्ते नफ्स का जज़्बा हर किस्म की कामयाबी की चाभी है और जो खुद को कंट्रोल कर सकता है वह पुरी दुनिया को कंट्रोल कर सकता हैl रोज़ा अपनी बातिनी शख्सियत को मजबूत करने की एक सालाना मश्क हैl

 
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NEW COMMENTS

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    ( By Lenny SB )
  • Please read my article on subject of "there is no compulsion in Religion...
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  • Arbitration is of two kinds - binding and non-binding. When the parties choose binding arbitration, the decision of the arbitrator is binding on the parties ...
    ( By Naseer Ahmed )
  • All right thinking Muslims must welcome such a course. Academic independence of the Universities must be protected and respected. There ....
    ( By Naseer Ahmed )
  • Referring to your comment: 7/18/2018 5:04:08 AM, to you both views are valid and fitna could mean “shirk or polytheism” also. The Quran clearly commands ...
    ( By Naseer Ahmed )
  • What do I mean by acceptance? Read the Quran carefully. There isn’t any verse that calls for tolerance of the peaceful rejecter of Islam. There ...
    ( By Naseer Ahmed )
  • The title question sums up the matter of the article. The answer is the course will discuss in detail how Muslim clerics and fundamentalists misinterpret ...
    ( By arshad )
  • Site Web Israel and Myanmar give more rights to muslims, than muslims give rights to Kafirs,...
    ( By Shan Barani )
  • Good article. The is only One G-d and Muhammad was the final messenger and prophet of G-d. As I write,..
    ( By Lenny SB (Shivarsi) )
  • I fully agree with Faizur Rahman sahib. Such "courts" should be called "Arbitration centers.
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • A course on "Uses of religions to gain political power" would be entirely appropriate. By the way, Obama refused to use the label "Islamic....
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • بہت بہت شکریہ جناب! اللہ عز و جل آپ کے مبارک کلمات کو مستجاب کرے۔ آمین بجاہ سید المرسلین صلی اللہ علیہ وسلم
    ( By misbahul Huda quadri )
  • fve questions
    ( By hats off! )
  • بہت عمدہ ۔ اللہ تعالی ہم مسلمانوں کو صوفیائے کرام کے نہج پر شریعت و طریقت کو سمجھنے اور اس پر عمل کرنے ...
    ( By Ghulam Ghaus Siddiqi غلام غوث الصدیقی )
  • Mushrik and muwahhid, Muslims and non-Muslims all equally need to adopt the path of tolerance. One sided tolerance is not helpful. This point should also ...
    ( By Ghulam Ghaus Siddiqi غلام غوث الصدیقی )
  • Naseer sb, Muhammad bin Ishaq said that Az-Zuhri informed him from Urwah bin Az-Zubayr and other scholars that (until there is no more fitnah) the Fitnah ...
    ( By Ghulam Ghaus Siddiqi غلام غوث الصدیقی )
  • An excellent read that contextualises many pertinent issues connected to Muslims and Islam! Your angle ....
    ( By Meera )
  • Naseer sb, Can you suggest me how many books have you read on theology? From your comments it appears you have been inspired by orientalist ...
    ( By Ghulam Ghaus Siddiqi غلام غوث الصدیقی )
  • Naseer sahib, What is theology? Why do you use theology in general term? In your comment you meant that those who follow theology are following ....
    ( By Ghulam Ghaus Siddiqi غلام غوث الصدیقی )
  • Before I say anything further, could you please explain your questions? What do you mean by acceptance?....
    ( By Ghulam Ghaus Siddiqi غلام غوث الصدیقی )
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    ( By Rashid Samnakay )
  • I fully agree with Rashid sahib.
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • At this rate Hats Off may soon get some insight into his unquenchable hatred of Muslims.
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • This is the time when the anti-Muslim hate propaganda of the BJP/RSS is at full blast to cover up for the absence of any acchhe ...
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • Excellent book review! As the reviewer says, "secularism cannot be used as a pretext to ignore discrimination on grounds....
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • Very true.
    ( By Sahab Ali Khan )
  • Read Ghulam Mohiyuddin Sb's comment. He is saying the same thing. So, can you speak of acceptance rather than tolerance? Will the Muslims accept ...
    ( By Naseer Ahmed )
  • Naseer sb, You always express your wrath by the word ‘bigoted’. It is your style and I should ignore it with the faith in this ...
    ( By Ghulam Ghaus Siddiqi غلام غوث الصديقي )
  • Dear Ghulam Rasool Delhvi sahab, You have rightly pointed out your concerns about misuse of martyrdom. I too have many concerns to share ....
    ( By Ghulam Ghaus Siddiqi غلام غوث الصديقي )
  • hatred of unbelievers, atheists, polytheists and idol-worshipers among the semitic religions is because they never met a polytheist, idolator, unbelievr or atheist. no? or did ...
    ( By hats off! )
  • Such is a voice in the religious wilderness of any bigoted majoritarian country, pleading for the Rights of all non-combatant, loyal and law abiding minority ...
    ( By Rashid Samnakay )
  • Islamophobia is based on media accounts of the activities of Al Qaeda and ISIS, not on actually knowing personally a true Muslim.
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • Broadening one's horizons is always better than exclusivism and takfirism. Religions are our common human heritage, not our baap ki jaagir.
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • Incorrect - Islamophobia is strongest ( polarisation ) whenever Muslims exceed 20% in a locality - In Muslim concentration seats, such as...
    ( By shan barani )
  • The problem is: Militants' message finds resonance among angry and frustrated Muslims who fall prey to twisted interpretations of Islamic doctrines. Jihadists aspire ...
    ( By Ghulam Rasool Dehlvi )
  • I agree! Islam is all about doing the right thing.
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • Very good article! If we think of it, the very idea of any religion having a special relationship with the state or the ...
    ( By Ghulam Mohiyuddin )