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मौजूदा दौर में मुसलमान देश में जिन हालात से गुजर रहे हैं यह सब हमारे कार्यों का परिणाम है हमनें दूरदृष्टि से काम लिया होता बुद्धि से काम लिया होता या उनके विचारकों की बातों को स्वीकार कर लिया होता तो आज यह दिन देखने को नहीं मिलते हम भावनात्मक उलेमा के पीछे भागते रहे जिन्होंने सही तरीके से मार्गदर्शन नहीं की जिन हालात का हम आज सामना कर रहे हैं जिन घटनाओं के हम चश्मदीद गवाह हैं वे अचानक नहीं आए बल्कि इसके पीछे कुछ दल और संगठन कई दहों से लगातार काम करती रही हैं जो परिणाम आज सामने आ रहा है हो सकता है यह शुरुआत हो क्योंकि देश की बहुमत उनके संगठनों से नहीं जुड़ी है और सहमत नहीं करते हैं जिस दिन वे भी उनके साथ हो जाएंगे देश के हालात बद से बदतर हो सकते हैं अभी तक जो उनके साथ नहीं हैं मुसलमान उन्हें अपना दोस्त बना लें और उनका दिल जीतें दिल जीतने के लिए कुछ बलिदान भी देना होगा इस में एक बलिदान गौ कुशी भी हो सकती है।

 

It Is True That ‘Terrorism Has No Religion’  यह सच है कि 'आतंकवाद का कोई धर्म नहीं है' लेकिन इस्लाम को आधुनिकता को गले लगाना ही होगा
Rakesh Sinha

यह सच है कि 'आतंकवाद का कोई धर्म नहीं है'। लेकिन इससे हमें मौजूदा इस्लामी आतंकवाद के जटिल मुद्दे का समाधान नहीं मिलने वाला है। जब तक मुस्लिम समाज इन समस्याओं को स्वीकार नहीं करता तब तक ऐसे तत्व मुस्लिम नौजवानों के सरल मन में अपनी बीज बोते रहेंगे। अल्पसंख्यक संस्थानों और विशेष रूप से मुसलमानों द्वारा प्रशासित संस्थानों को इस्लाम की ऐसी सही स्पष्टीकरण के द्वारा आईएसआईएस को बेनकाब करना चाहिए।

Respect for Women in Islam  इस्लाम में नारी जाति का सम्मान
Talha Haroon, New Age Islam

इस्लाम में महिलाओं का बड़ा ऊंचा स्थान है। इस्लाम ने महिलाओं को अपने जीवन के हर भाग में महत्व प्रदान किया है। माँ के रूप में उसे सम्मान प्रदान किया है, पत्नी के रूप में उसे सम्मान प्रदान किया है, बेटी के रूप में उसे सम्मान प्रदान किया है, बहन के रूप में उसे सम्मान प्रदान किया है, विधवा के रूप में उसे सम्मान प्रदान किया है, खाला के रूप में उसे सम्मान प्रदान किया है, तात्पर्य यह कि विभिन्न परिस्थितियों में उसे सम्मान प्रदान किया है जिन्हें बयान करने का यहाँ अवसर नहीं हम तो बस उपर्युक्त कुछ स्थितियों में इस्लाम में महिलाओं के सम्मान पर संक्षिप्त में प्रकाश डालेंगे।

 

Education Necessary to Lead the World: Why then Muslims Are Depriving Girls from It  संसार के नेतृत्व के लिये शिक्षा का होना आवश्यक फिर आखिर लोग इस्लाम में लड़कियों को शिक्षा से महरूम क्यों कर रहे हैं
Talha Haroon, New Age Islam

अल्लाह के अंतिम पैगम्बर हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हिदायत का पैकर बनकर इस संसार में पधारे l उन्होनें सम्पूर्ण संसार को ज्ञान के प्रकाश से जगमगाया l यही कारण है कि पवित्र कुरआन में अल्लाह पाक ने फरमाया कि शिक्षित (अहले इल्म) और अशिक्षित (जाहिल) कभी बराबर हो ही नहीं सकते l शिक्षा अर्थात इल्म ही सभी तरक्की और सफलता का माद्ध्यम है l या इस प्रकार कह सकते हैं कि दुनिया की कयादत (नेतृत्व) के लिये इल्म सबसे आवश्यक है l

 

There is no Issue in Accepting the Defeat  हार मान लेने में कोई हर्ज नहीं है
Shakeel Shamsi

उन्हें सोचना होगा कि केवल भाजपा को सत्ता में आने से रोकने की कोशिश को वे लोग चुनाव का कोई मुद्दा क्यों नहीं बना सके? अपनी सत्ता खोने वालों को खुद से ही सवाल करना चाहिए कि राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल, उलेमा और मशाईख बोर्ड और शिया आलिमों ने उनके खिलाफ वोट डालने की अपील क्यों कीं? पराजित पार्टी ने मुसलमानों के कल्याण का ख्याल रखा या अपनी पार्टी के मुस्लिम नेताओं की झोलियाँ भरीं? क्या मुजफ्फरनगर दंगा पीड़ितों का पुनर्वास ऐसा कोई मुद्दा नहीं था जिसकी वजह से मुसलमान नाराज होकर दूसरी पार्टी को वोट दे देने पर मजबूर हुए?

 

आम तौर पर यह ख़याल है कि भारत में मुसलमानों की आबादी मुहम्मद ग़ौरी के हमलों के बाद शुरू हुई। यह विचार गलत नहीं भ्रामक भी है। मोहम्मद गौरी के हमले से पहले (यानी हिन्दू राजाओं के राज में) भारत में कई जगह मुसलमानों की नई आबादियाँ थीं जहां उनके मदरसे, खानकाह और धार्मिक संस्थान स्थापित थे। जो लोग धार्मिक संस्थानों के गठन और निर्माण की हतोत्साहित कठिनाइयों का थोड़ा सा भी अनुभव रखते हैं वही उनके दुख का भी अनुमान लगा सकते हैं जिनसे उनके बड़ों को दो चार होना पड़ा। अजमेर के अलावा जहां ख्वाजा मोईनुद्दीन ने पृथ्वीराज के ज़माने में अपनी खानकाह बनाई थी, बदायूं, कन्नौज, नागौर और बिहार के कुछ शहरों में मुसलमानों की खासी आबादी थी।

 
Ayodhya Dispute अयोध्या विवाद
Syed Mansoor Agha, Tr.New Age Islam

Ayodhya Dispute  अयोध्या विवाद
Syed Mansoor Agha

इस विश्वास को परवान चढ़ाने की राजनीतिक प्रक्रिया स्वतंत्रता के तुरंत बाद ही उस समय शुरू हो गयी थी जब 22 और 23 दिसंबर 1948 की रात में चबूतरे से उठाकर मूर्तियां मस्जिद की मेहराब में रख दी गईं और 6 दिसंबर 1992 को उस समय चरम पर पहुंची जब आडवाणी जी, अशोक सिंघल और दुसरे संघी नेताओं की पुकार पर लाखों कानून विरोधी अयोध्या में इकट्ठे हुए और उन नेताओं की मौजूदगी में एक प्राचीन आराधनालय को ध्वस्त कर दिया गया और फिर सरकार की निगरानी में उसके मलबे पर अस्थायी ही सही, मंदिर बना दिया गया। इस दौरान किस किस का क्या रोल रहा? यह बताने की जरूरत नहीं। जब मूर्तियां रखी गईं तब भी कांग्रेस की सरकार थी। जब ताला खुला तब भी जब शीलान्यास हुआ तब और जब मस्जिद गिराई गई तब भी सरकार कांग्रेस की ही थी।

 

How Low have We Fallen  यह कहाँ आ गए हम
Qasim Syed

दुनिया में दीन की दावत की निस्वार्थ सेवा और अल्लाह के बन्दों तक उसका संदेश पहुंचाने में सक्रिय जमाअत में गुटीय कलह का प्रभाव मुंबई में नज़र आया। मलाड क्षेत्र की कोकनी पाड़ह की नूरानी मस्जिद में 5 मार्च को तबलीगी जमाअत के दो समूहों में आपसी तकरार और गरमा-गरमी, लाठी-डंडे के स्वतंत्र उपयोग तक पहुँच गई, अल्लाह के दीन की दावत देने वालों के कपड़े और दाढ़ी खून से भीग गए। अस्पताल में भर्ती किए गए, पुलिस ने हिरासत में लिया अब पुलिस वैन के साथ पुलिसकर्मियों को मस्जिद के बाहर तैनात किया गया है। बताया जाता है कि अफ्रीका से आई एक जमाअत के कयाम पर दोनों समूहों में झगड़ा हो गया था। अदालत से जमानत हुई, स्थिति तनावपूर्ण हैं।

 

United Nations and the Question of Quran’s Interpretation  यु एन और पवित्र कुरआन की व्याख्या का प्रश्न
Mashari Althayadi

किसी अंतर्राष्ट्रीय अधिकारी की ओर से यह एक अच्छी अभिव्यक्ति थी। वह ईसाई हैं और इसके बावजूद उन्होंने इस्लामी आस्था की सराहना की है लेकिन संयुक्त राष्ट्र का मिशन ऐसे प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि संयुक्त राष्ट्र को शांति और न्याय की बहाली के लिए गंभीर कदम उठाना चाहिए क्योंकि जहाँ न्याय और दया का बोलबाला होगा, अल्लाह के दीन भी बुलंद होगा। इसके लिए स्पष्टीकरण के समुद्र में गोता लगानें की भी आवश्यकता नहीं होगी। यह एक कठिन बात है और इसके लिए बहुत कौशल की आवश्यकता पड़ती है।

 

Deepening Signs of a Civil War in Islam  गृहयुद्ध के गहरे लक्षण: शुद्ध इस्लाम के नाम पर पाकिस्तान में सूफी मुसलमानों का नरसंहार बिगड़ते वैश्विक संकट को प्रकट करता है
Sultan Shahin, Founding Editor, New Age Islam

हालांकि सल्फ़ी बनाम सूफी गृहयुद्ध केवल पाकिस्तान की ही समस्या नहीं है। मुसलमान एक वैश्विक समुदाय हैं। अब लोग हर जगह संघर्ष का निरीक्षण कर सकते हैं। और भारत भी सुरक्षित नहीं है। हमें पहले से ही बेहद सावधान रहने की आवश्यकता है इसलिए कि कट्टरपंथ के प्रकाशन के आसार यहां भी काफी हैं। यहां तक कि कुछ मुस्लिम युवक, जो अच्छी तरह से शिक्षित हैं, आलीशान हैं, अच्छे रोजगार के साथ जुड़े हुए हैं और जो अच्छी तरह अपना जीवन आबाद किए हुए हैं वह भी तथाकथित इस्लामी राज्य के लिए लड़ने की खातिर अपना सब कुछ छोड़ रहे हैं, और केवल यही बात हमारी चिंता के लिए पर्याप्त होना चाहिए। लेकिन सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि ज्यादातर भारतीय मुसलमान इस संबंध में चिंतित नहीं हैं। हमारे समाज में जो कुछ भी नकारात्मक बातें उजागर होती हैं उनका आरोप इसराइल और इस्लामोफोबिया पर डाल कर उन गंभीर स्थिति से अनजान होकर हम खुश हैं। अगर हम एक दुसरे से जुड़े इस दुनिया में एक शांतिपूर्ण जीवन चाहते हैं तो हमें तुरंत अपना नजरिया बदलना होगा।

 

Are ISIS, Taliban and Al-Qaeda Kharijite Organisations? (Concluding part)  क्या आइएसआइएस, तालिबान और अलक़ायदा ख़वारिज संगठन हैं? (अंतिम भाग)
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

शेख कल्बानी का इस बात को स्वीकार करना बिल्कुल सही है। जिस तरह इब्न अब्दुल वहाब का दावा था कि सभी मुसलमानों को चाहिए कि एक खलीफा की बैअत करें और जो व्यक्ति उसके अकीदे और विचारों को न माने उसे मार दिया जाए, उनकी महिलाओं और लड़कियों के साथ ज़बरदस्ती की जाए और उनके धन दौलत छीन लिए जाएँl उसकी नज़र में मौत के हकदार गैर मुसलमानों की सूची में शिया, सूफी और वह मुसलमान अल्पसंख्यक थे कि जिन्हें वह मुसलमान नहीं मानता था। ठीक इसी तरह आईएसआईएस भी चाहता है कि सभी मुसलमान उसकी तथाकथित '' खिलाफत '' को स्वीकार करें, और जो इसे स्वीकार करने से इंकार करे उसकी बेरहमी से हत्या कर दी जाए, उनकी महिलाओं को गुलाम बना लिया जाए। इब्न अब्दुल वहाब की तरह आईएसआईएस का भी उद्देश्य सुन्नी, सूफी, शिया और उन सभी मुसलमानों को मारने के लिए है जिन्हें वह मुसलमान नहीं मानते।

 

Are ISIS, Taliban and Al-Qaeda Kharijite Organisations? (Part-7)  क्या आइएसआइएस, तालिबान और अलक़ायदा खवारिज संगठन हैं? (भाग-7)
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

ख्वारिज का मानना है कि उनके विरोध करने वाले तमाम मुसलमान मुशरिक हैं| ख्वारिज एक खतरनाक फिरका अज़ारेका है जिसका विश्वास है कि उनके विरोधी तमाम मुसलमान मुशरिक हैं, जो उनका निमंत्रण स्वीकार नहीं करेगा और उनके मज़हब को नहीं अपनाए गा उसका खून, उसकी औरत हलाल हैं, उन लोगों ने अली रदि अल्लाहू अन्हू को काफ़िर और उनके हत्यारे अब्दुर रहमान बिन मुलजिम को बहादुर शहीद गर्दाना हैl

 

Are ISIS, Taliban and Al-Qaeda Kahrijite Organisations? (Part-6)  क्या आइएसआइएस, तालिबान और अलक़ायदा ख़वारिज संगठन हैं? (भाग-6)
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

'सऊदी सरकार ने अपने राज्य में अल्लामा शामी की'' किताब रद्दुल मोह्तार की इस इबारत की वजह से सऊदी हुकूमत में प्रवेश निषिद्ध कर दिया है। मैं कहता हूँ: उन्होंने '' रद्दुल मोह्तार 'का प्रवेश तो अपनी सरकार में बंद कर दिया है लेकिन वह इस हदीस का क्या करेंगे: 'हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रदि अल्लाहु अन्हुमा बयान करते हैं कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने प्रार्थना की: ऐ अल्लाह हमारे शाम में और हमारे यमन में बरकत अता फरमा, सहाबा ने अर्ज़ किया: और हमारे नजद में? आपनें प्रार्थना की: ऐ अल्लाह हमारे शाम में और हमारे यमन में बरकत अता फरमा, सहाबा ने अर्ज़ किया: और हमारे नजद में? आपने फरमाया: वहाँ भूकंप और फ़ित्ने होंगे और वहीं से शैतान का सींग निकलेगा

 

Are ISIS, Taliban and Al-Qaeda Kahrijite Organisations?  क्या आइएसआइएस, तालिबान और अलक़ायदा ख़वारिज सिफ़त संगठन हैं? (भाग-5)
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

हाफ़िज़ इब्ने हजर ख़वारिज  के संबंधित में लिखते हैं: ''तिलावत व इबादत में उनकी मेहनत की तीव्रता को देखकर उन्हें कुर्रा (कुरान को सहीह से पढने वाले) कहा जाता था। लेकिन ये लोग (ख़वारिज) कुरआन की गलत तावीलें करते थे और अपनी राय ठुसने की कोशिश करते थे। दुनिया से बे रगबती (अनिच्छा) और विनम्रता आदि में कोताही से काम लेते थे।'' (देखिये: फ़तहुल बारी: 12/291)

 

दुनिया की नज़र से यह तथ्य भी छिपा नहीं है कि वहाबी समुदाय की जमातुद्दावा ... हरकतुल मुजाहिदीन ... सिपाहे सहाबा .... लश्करे तैय्यबा ...... अलकायदा ...... लश्करे झिन्ग्वी ...... जैशे मुहम्मद ..... और अन्य आतंकवादी संगठनों के बारे में आज तक देवबंदी और अहले हदीस दलों द्वारा यह घोषणा कभी नहीं किया गया कि उक्त आतंकवादी दल जिहाद के नाम पर दंगे और विनाश फैलाकर बेगुनाहों की हत्या करते हुए इस्लाम और मुसलमानों को बदनाम कर रही हैं। इसलिए मुसलमान इन आतंकवादी मौलवियों और उनके आतंकवादी दलों से किसी भी तरह का कोई रिश्ता और संबंध स्थापित ना करें।

 

Are ISIS, Taliban and Al-Qaeda Kahrijite Organisations? (Part-4)  क्या आइएसआइएस, तालिबान और अलक़ायदा ख़वारिज हैं? (भाग- 4)
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

अगर हम मान भी लें कि आईएसआइएस के लोग कुछ धार्मिक मामलों का पालन करते हैं, जैसे: दाढ़ी रखते हैं और नमाजों की अदाएगी पर खूब जोर देते हैं, तो इसका कभी ये मतलब नहीं निकलता कि आईएसआइएस पूरे धर्म को अपनाए हुए है। क्योंकि संगठन में बहुत बड़ी कमियां और दोष और जोखिम पाये जाते हैं, जैसे: बद अकीदगी, शरीअत का उल्लंघन, क्रियाविधि की खराबी, कुरआन व सुन्नत की प्रावधान से संबंधित गलत समझ रखना और उनकी मन गढ़त तावीलात, तैश और इफरात का शिकार होना, सही अक़ीदे के मुसलमानों की गलत निन्दा करना, मुसलमानों को बेरहमी से मारना, उनके धन को लूटना, झूठ, धोखाधड़ी, विश्वासघात, विद्वानों और नेक लोगों पर ताना ज़नी करना, सूफी सुन्नी उलेमा ए दीने मतीन पर बदएतमादी यहां तक कि उनकी हत्या करना आदि। इसलिए धर्म के कुछ बाहरी मामलों को अपना लेना और दूसरी ओर अकाएद और बड़े मामलों को नजरअंदाज करना, वास्तव में धर्म को सही ढंग से न अपनाने की अभिव्यक्ति है।

 

Are ISIS, Taliban and Al-Qaeda Kahrijite Organisations?   क्या आइएसआइएस, तालिबान और अलक़ायदा खवारिज हैं? (भाग- 3)
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

खवारिज इस्लामी समुदाय पर एक खतरनाक और फितना फ़ैलाने वाला समूह है, यही कारण है कि पैगम्बर सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की अहादीस के अंदर स्पष्ट रूप से उनकी पूरी निशानियों का वर्णन किया गया है, ताकि यह लोगों में अपने मामले पर भ्रम न कर सकें। बहुत सारे अहादीस, सहाबा रदी अल्लाहु अन्हुम के बातों और असलाफ (पुर्वजों) की पुस्तकों में खवारिज की उक्त गुणों का अध्ययन करने के बाद यह बात साबित होती है कि आईएसआईएस, तालिबान, अलकायदा और उनके जैसे अन्य आतंकवादी संगठन खवारिज हैं जो अपने बुरे कार्यों और गलत अकाइद के कारण दीन से बाहर हैं। यहां पाठकों के लिए खवारिज की 43 विशेष लक्षण संदर्भ के साथ नकल कर रहा हूँ ताकि वे आतंकवादी समूहों को खवारिज करार देने में किसी तरह का कोई संदेह महसूस न करें।

 

Are ISIS, Taliban and Al-Qaeda Kahrijite Organisations? (Part-2)  क्या आइएसआइएस, तालिबान और अलक़ायदा  खवारिज हैं? (भाग- २)
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

फ़ितना ए खवारिज का प्रारम्भ इस्लाम की पहली सदी में आकाए दो जहाँ सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की शान में ज़ुल खुवैसरा तमीमी नामक गुस्ताख़ की गुस्ताखी से हुआ। हज़रत अबू सईद खुदरी रदि अल्लाहु अन्हु बयान करते हैं कि एक बार पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम माले ग़नीमत बांट रहे थे कि अब्दुल्लाह बिन जिल खुवैसरा तमीमी आया और कहने लगा: "ऐ अल्लाह के रसूल! न्याय से काम लीजिए।" आप ने फरमाया: "तुम्हारी खराबी! यदि मैं न्याय न करूंगा तो और कौन करेगा?" हजरत उमर रदि अल्लाहु अन्हु नें अर्ज़ किया: "मुझे अनुमति दें कि उसकी गर्दन उड़ा दूं।" आप ने फरमाया: "इसे छोड़ दीजिए। इसके ऐसे साथी हैं कि आप में से कोई व्यक्ति, उनकी नमाज़ के मुकाबले में अपनी नमाज़ को हकीर समझेगा और अपने रोज़े को उनके रोज़े से कमतर समझेगा। ये लोग दीन से ऐसे निकल जाएंगे जैसे तीर शिकार से निकल जाता है और उसके पंखों को देखा जाए तो कुछ पता नहीं होता है। फिर उस (तीर के) फल को देखा जाए तो पता नहीं चलता है (कि यह शिकार के अंदर से हो कर गुजरा है) हालांकि वह खून और गोबर से होकर गुजरा है। उनकी निशानी होगी कि उनमें एक ऐसा व्यक्ति होगा जिसका एक हाथ या एक छाती, औरत के स्तन की तरह होगी। या फरमाया कि मांस के लोथड़े की तरह होगी और हिलती होगी। यह लोगों में गृहयुद्ध के समय निकलेंगे”|

 

Are ISIS, Taliban and Al-Qaeda Kahrijite Organisations?  क्या आइएसआइएस तालिबान और अलक़ायदा खारजी संगठन हैं? भाग- 1
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

इराक, सीरिया, यमन, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, सूडान, सोमालिया और अन्य प्रभावित देशों में समग्र रूप से जितनी जानों का खून बहाया गया है उनमें 99 प्रतिशत मुसलमान ही हैं। यहाँ घाव पर नमक छिड़कने वाली बात यह है कि अब तक यह आतंकवादी संगठन अपने घृणित इरादों और गलत उद्देश्यों की पूर्ति के लिए केवल इस्लाम और मुसलमानों के नाम का उपयोग कर रही हैं। कुरआनी आयातों, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की हदीसों और फ़िक़्ही रचनाओं का दरुपयोग और गलत व्याख्या करके अपने गैर इस्लामी कार्यों को जायज़ करार दे रही हैं और इस्लामी स्रोत से अनजान भोले-भाले मुसलमानों और युवाओं को प्रभावित कर रही हैं।

 

दुनिया बनाने और उसमें इंसानों के बसाए जाने के उद्देश्य को स्पष्ट किया, बताया कि सब का निर्माता और मालिक एक है, उसका कोई साझी नही, वही पूजा के योग्य है, दुनिया की व्यवस्था उसी के दम से है, हर चीज़ पर उसकी सरकार व संप्रभुता है, मृत्यु और जीवन का वही निर्माता है, लाभ व हानि का वही आविष्कारक है, उसकी इच्छा के बिना न कोई पत्ता हिल सकता है, ना कोई बूंद गिर सकता है, और न ही कोई चीज़ अस्तित्व में आ सकती है, उसनें एक उद्देश्य के तहत और एक निर्धारित समय देकर मनुष्य को संसार में भेजा है, मानव का वास्तविक जीवन आख़िरत है जो असीमित है इसके बाद खुदा की नज़दीकी और पुरस्कार प्राप्ती का आधार संसार में खुदा और पैगंबरे खुदा की आज्ञा के पालन पर निर्भर है, नबी ए रहमत की बेसत का उद्देश्य ही मनुष्य को अल्लाह की इच्छा बताना और इसके अनुसार जीवन जीने की व्यावहारिक स्थिति प्रदर्शित करना है,

How Islamic Is Instant Triple Talaq?  एक साथ तीन तलाक इस्लामी कैसे?
Sultan Shahin, Founding Editor, New Age Islam

हलाला भारतीय मुसलमानों के अंदर सबसे अश्लील सामाजिक कर्म है जिसे उलेमा के सभी वर्गों का समर्थन प्राप्त है। अगर तीन तलाक की प्रक्रिया समाप्त कर दिया जाए या एक ही बार में दी जाने वाली तीन तलाक को एक ही कुरआनी तलाक माना जाए तो यह सामाजिक मामूल खुद बखुद खतम हो जाएगा। जैसा कि मोरक्को, कुवैत, यमन, अफगानिस्तान, लीबिया, कुवैत, कतर, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, पाकिस्तान, बांग्लादेश, मिस्र, सीरिया, जॉर्डन, इराक, सूडान सहित 22 मुस्लिम देशों में इस पर अमल किया जाता है ।

 

The Period of Youth  किशोरावस्था का दौर
Maulana Wahiduddin Khan for New Age Islam

क्या हमने इस युग में दूसरों के साथ शांति और सद्भाव के साथ जीवन गुज़ारा है या हमने दूसरों के लिए समस्याएं पैदा किए थे? क्या हम जवानी के इस दौर में दूसरों के लिए भलाई का एक स्रोत थे या हमने लोगों को नुकसान पहुंचाया है? किशोरावस्था हमारे जीवन का एक बहुत ही क़ीमती हिस्सा है। जीवन के इस चरण में हमारे पास दूसरों को देने के लिए बहुत कुछ होता है। अगर जीवन के इस लम्हे को हम सही ढंग से बिताते हैं तो हमारा जीवन एक सुखद आशीर्वाद बन सकता है।

 

God’s Mercy and Compassion  अल्लाह की रहमत और मेहरबानी
Sadia Dehlvi

शैख इब्ने अल-अरबी का मानना ​​था कि सभी मनुष्यों के साथ सम्मान और दया का प्रदर्शन किया जाए और उनके साथ नेक नीयती के साथ मामले अंजाम दिए जाएं। उनका कहना है कि, "सभी मनुष्यों के साथ समान व्यवहार करो चाहे वह राजा हो या भिखारी, छोटा हो या बड़ा, यह जान लो कि सभी मानव जाति एक शरीर की तरह है और लोग इसके सदस्य हैं। एक शरीर अपने जुज़ईयात के बिना पूरा नहीं। विद्वानों का अधिकार सम्मान है और जाहिलों का अधिकार सही सलाह है, लापरवाह व्यक्ति का अधिकार है कि उसे जागरूक किया जाए और बच्चों का अधिकार है कि उनके साथ सहानुभूति और प्यार का मामला हो। अपने परिवार और दोस्तों के साथ अपने कर्मचारियों के साथ, अपने पालतू जानवरों के साथ और अपने बगीचे के पेड़ पौधों के साथ अच्छा व्यवहार करो। उन्हें खुदा ने तुम्हारी अमानत में रखा है और तुम अल्लाह पाक की अमान में हो। हमेशा हर इंसान के प्रति प्यार, उदारता, सहानुभूति, अनुग्रह और सुरक्षा का प्रदर्शन करो। "

 

भारत वर्ष 2050 तक दुनिया में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाला देश हो जाएगा और इस मामले में वह सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया को पीछे छोड़ देगा जबकि उस समय तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आबादी हिंदुओं की हो जाएगी। प्यू रिसर्च सेंटर द्वारा गुरुवार को जारी धर्म से संबंधित अनुमानों के आंकड़ों के अनुसार दुनिया की कुल आबादी की तुलना में मुसलमानों की आबादी तेजी से बढ़ने का अनुमान है और हिंदू और ईसाई आबादी वैश्विक जनसंख्या वृद्धि की गति के अनुसार रहेगी।

 

The Prophet Muhammad—A Great Humanitarian  पैगम्बर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम – एक महानतम मानवता पसंद
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

पैगम्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के द्वारा सिखाए गए महत्वपूर्ण पाठ में से एक यह है कि हमें दूसरों के बीच फूलों की तरह रहना चाहिए कांटों की तरह नहीं। यहूदी और मुसलमान मदीना में एक साथ शांति से रहते थे। पैगम्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने स्वतंत्र रूप से उन्हें अपने धर्म का पालन करने की अनुमति दे रखी थी। इसके अलावा पैगम्बर मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने अपने अनुयायियों को बताया कि अगर किसी ने किसी भी तरह किसी गैर मुस्लिम [जिम्मी] की हत्या या उनके साथ बुरा व्यवहार किया तो वह जन्नत की खुशबू नहीं सूंघ सकेगा और नबी सल्लाल्ल्हू अलैहि वसल्लम क़यामत के दिन खुद उस जिम्मी (गैर मुस्लिम) का पक्ष लेंगे। [10] हुजुर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमेशा ईसाइयों, यहूदियों और मुशरिकों के साथ शांति की इच्छा व्यक्त की,

 
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  • Inequality in what has come to be known as personal laws exists across all religious...
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • "Will you then compel mankind, against their will, to believe?” (Q10:99). Words that are so clear and yet so forgotten!....
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • New idea is a "bidyat," and they r kafir only No matter from where he is. This world...
    ( By Syed Javed Jafar )
  • Such atrocities only tell us how far we are from what we call 'civilisation
    ( By Meera )
  • Chapar ganju...hindu hindu karta firta hai. Khud ka dharm to pata nahi Aur Islam pe unlngli uthata hai.ek baat kah dun jispe tum ungli uthare ho ...
    ( By Tarik Ahmad )
  • Appeal Ka Asar hooga'
    ( By ASLAM QURAISHI )
  • Dear Sheik Aftar Ali, It appears to me that you have not read the article closely. I have not talked about ....
    ( By muhammd yunus )
  • It is true “An examination of the foundations of the Islamic faith shows respect for Christianity” Koran 5:82 states as follows “And you will find the nearest ...
    ( By Royalj )
  • This is to express ones disgust at this sordid affair generated by blasphemy law anywhere in Muslim world! Historically Muhammad the Messenger of God during his ...
    ( By Rashid Samnakay )
  • Quran 2:11 is applicable to Muslims as well as non-Muslims since it mentions that Muslims should not make mischief on ....
    ( By zuma )
  • I had meant the following comment to be posted in "Islamic World News" section. Sorry!
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • Quran 2:220 demands Muslims to deal justly and instead of deceitfully. The following is the extract: (سورة البقرة, Al-Baqara, Chapter #2, Verse #220)-Mohsin ...
    ( By zuma )
  • Ok then u accept the salafi or shia ideology
    ( By Sheik Aftar Ali )
  • Respected - dear AIMPLB see how our indian muslims will think differently and identify indian muslim and how integrate all indians. any language - dress ...
    ( By Kolipaka Sudeep Kumar )
  • Proofs please. Some anonymous old man (no name), some anonymous young men (no names), police complaints withdrawn (no FIR records). The name of the....
    ( By Unmai Virumbi )
  • Quran 2:204-205 support the same that Allah dislikes Muslims to make mischief on the earth. The following are the extracts: (سورة البقرة, Al-Baqara....
    ( By zuma )
  • I completely disagree with this statement"The so called fringe is perhaps not the fringe at all; it actually tells us how the majority within this ...
    ( By awaya )
  • Does Allah loves the just? Allah certainly loves the just. Or else, Allah would not mention the phrase, Make not mischief ....
    ( By zuma )
  • Dear Muhammd Yunus, You have mentioned in your comment about Allah does not forbid Muslims to be virtuous and just to those Muslims who ...
    ( By zuma )
  • Blasphemy laws must be abolished. They are in-Islamic.
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • The New York Times has published one editorial, three op-eds and two news stories on Farooq Ahmed Dar's photo already!​ I am sure this does ...
    ( By Ghulam Mohiyuddin )