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Why Indian Muslims do not need to follow Extremists’ Call for Hijrat  भारतीय मुसलमानों को अतिवादियों की हिजरत की दावत पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

बिलकुल यही मफहूम उस एतेहासिक तथ्य से भी निकाला जा सकता है कि मक्का विजय के बाद जब मुसलामानों को धार्मिक स्वतन्त्रता प्राप्त हो गई और उनके लिए जान व माल की सुरक्षा निश्चित हो गई तो हिजरत का आदेश मंसूख कर दिया गया, जैसा कि उपर्युक्त हदीस से स्पष्ट है जिसका मफहूम यह है कि मक्का विजय के बाद हिजरत का कोई हुक्म बाकी नहीं रहाl इसलिए, अब किसी भी अतिवादी धार्मिक लीडर या किसी इस्कॉलर को यह अनुमति नहीं कि वह मुसलामानों को भारत से किसी और देश की तरफ हिजरत की दावत दें, और इसकी वजह स्पष्ट है कि भारत मुसलामानों को धर्म की स्वतन्त्रता और जान व माल की सुरक्षा प्रदान करता हैl

Loyalists of Husain (RA): Dutt Husaini Brahmins  हुसैन रज़ीअल्लाहु अन्हु के वफादार: दत्त हुसैनी ब्राह्मण
S. Arshad, New Age Islam

दत्त हुसैनी ब्राह्मण, हिन्दू ब्राह्मणों का एक ऐसा वर्ग है जिसने हज़रत हुसैन रज़ीअल्लाहु अन्हु के साथ अपनी मुहब्बत और अकीदत का प्रमाण कर्बला के मैदान में दिया और हुसैन रज़ीअल्लाहु अन्हु के शहादत के बाद यज़ीद के विरुद्ध अभियानों में भाग लिया और यज़ीदियों को अंजाम तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण किरदार अदा किया मगर उनकी बलिदानों को इस काबिल नहीं समझा गया कि उन्हें इस्लामी इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान दिया जाएl एक दत्त हुसैनी ब्राह्मण रेहाब दत्त ने अपने सात बेटों को कर्बला में कुर्बान कर दिया और हुसैन रज़ीअल्लाहु अन्हु के शहादत के बाद मुख्तार सकफ़ी के साथ यज़ीदियों के खात्मे में भाग लियाl

 

कुरआन की यह आयत मुसलामानों को दुसरे खुदाओं के बारे में बुरा भला कहने से रोकती है, कि कहीं ऐसा ना हो कि इसके बदले में उनके मानने वाले तुम्हारे खुदा को गालियाँ देंl यहाँ रुक कर हमें इस बात पर गौर करना चाहिए विभिन्न धर्मों के अनुयायियों के बीच जो फसाद और क़त्ल व गारत गरी के घटनाएं घटित हुईं हैं उनमें से अक्सर की वजह यह रही है कि उन्होंने एक दुसरे के खुदाओं को और उनकी सम्मानित हस्तियों को बुरा भला कहाl निश्चित रूप से अनगिनत फसाद और मुठभेड़ की वजह यही रही हैl

 

आला हज़रत अपनी किताब मकालुल उर्फा में लिखते हैं: “इमाम शाफई रहमतुल्लाह अलैह फरमाते हैं: وما اتخذ اللہ ولیا جاھلا अर्थात अल्लाह ने कभी किसी जाहिल को अपना वली नहीं बनाया अर्थात बनाना चाहा तो पहले उसे इल्म दे दिया इसके बाद वली किया कि जो इल्म ए ज़ाहिर (दिखने वाला इल्म) नहीं रखता इल्म ए बातिन (नहीं दिखने वाला इल्म) जो कि उसका परिणाम है क्यों कर पा सकता है, हक़ तआला से संबंधित बन्दों के लिए पांच इल्म हैं: इल्म ए ज़ात, इल्म ए सिफात, इल्म ए अफआल, इल्म ए अस्माअ, इल्म ए अहकामl इनमें हर पहला दुसरे से अधिक कठिन है जो सबसे आसान इल्म ए अहकाम में आजिज़ होगा सबसे कठिन इल्म ए ज़ात क्यों कर पा सकेगा____”

 

Defeating Islamism and Jihadism  जेनेवा में सुलतान शाहीन का खिताब: इस्लामिज्म और जिहादिज्म की हार के लिए अमन व शांति, सहअस्तित्व और लैंगिक न्याय पर आधारित इस्लामिक थियोलौजी का गठन आवश्यक
Sultan Shahin, Founding Editor, New Age Islam

इस बढ़ती हुई इस्लामिज्म की अतिवाद के हवाले से सर्द मेहरी इस हद तक बढ़ चुकी है कि कुछ उच्च शिक्षा प्राप्त मुस्लिम अब यह कहते हुए दिखाई दे रहे हैं कि, “क्या हुआ अगर एक साल के अन्दर 86 देशों से तीस हज़ार मुसलामानों ने इस्लामी रियासत में शमूलियत इख्तियार की? 1.7 बिलियन लोगों की बिरादरी में उनकी प्रतिशत कितनी है?! इतनी छोटी और सीमित संख्या को बढ़ती हुई अतिवाद के सबूत के तौर पर कैसे पेश किया जा सकता है?” अकल हैरान है कि ऐसे विचारकों और बुद्धिजीवियों को कैसे जवाब दिया जाएl वास्तविकता यह है कि अगर एक मुसलमान को यह ;लगता है कि एक इंसानी बम की शक्ल में मस्जिद के अन्दर जाने और खुद को और दुसरे मुसलामानों को नमाज़ के दौरान धमाके से उड़ा देने पर खुदाई इनाम हासिल होगा, तो उम्मत के लिए यह अवश्य चिंता का क्षण है कि हमारे मज़हब में ऐसा क्या है जिसकी आड़ में आतंकवादी संगठन इस तरह के घिनावने अपराध का प्रतिबद्ध करने के लिए तैयार हो जाते हैं, क्या ऐसा करके वह जन्नत में दाखिल हो जाएंगेl उम्मत के लिए यह निश्चित रूप से गौर का मुकाम हैl उम्मत को सोचना चाहिए कि हिंसा में नुमाया इज़ाफा होता जा रहा है, यहाँ तक कि आतंकवादी अपराधों के सैंकड़ों घटनाओं के बावजूद भी हम बे हिसी की ज़िन्दगी गुज़ार रहे हैं, प्रतिदिन दुनिया के किसी ना किसी हिस्से से आतंकवाद की घटनाओं की सुचना मिलती है लेकिन हमें इसकी फ़िक्र कहाँ, हमें तो बेहिस ही बने रहना है!!

 

आयत (60:8) के बारे में अक्सर मुफ़स्सेरीन की एक राय यह है कि यह आयत मोहकम है और यह मंसूख नहीं हुईl इन आयतों में मुसलामानों को मुशरिकों और काफिरों सहित सभी गैर मुस्लिमों के साथ बराबर सुलूक करने से मना किया गया है इसका अर्थ यह है कि अल्लाह मुसलामानों को उन मुशरिकों और काफिरों सहित गैर मुस्लिमों के साथ अच्छा बर्ताव करने से मना नहीं करता जो मज़हब के मामले में मुसलामानों से जंग नहीं करते और मुसलामानों के साथ अमन और न्याय के साथ ज़िन्दगी गुजारते हैंl

 

Organ Donation Is What Is Called Sadqa Jariyah, Continuous Charity, in Islam  आर्गन डोनेशन (अंग दान) इस्लाम में सदका ए जारिया
Maulana Wahiduddin Khan

अंगों का दान आधुनिक सर्जरी का एक बड़ा उपहार हैl पिछले ज़माने में इस प्रकार का दान बिलकुल असंभव थाl अंगों का दान सभी धर्मों सहित इस्लाम में भी जायज हैl अधिक यह कि इस काम में बड़ा अज्र (इनाम) भी हैl एक मानव निर्मित ट्रांस्पलांट प्राकृतिक आर्गन ट्रांसप्लांट का विकल्प कभी नहीं हो सकताl

 

तिबयानुल कुरआन में है: कुरआन ए पाक की सीधे रास्ते पर दलालत है और मुत्तकीन को कुरआन ए पाक के अहकाम पर अमल की तौफीक भी नसीब होती है वह कुरआन ए पाक के अनवार से रौशनी तलब करने वाले और लाभ उठाने वाले होते हैं और कुरआन ए पाक में तदब्बुर और तफ़क्कुर करने से उनके दिमाग की गिरहें खुलती चली जाती हैं और गैर मुत्तकीन के लिए भी कुरआन ए पाक हिदायत है, नेकी और दुनिया की खैर की ओर राहनुमाई है, हालांकि वह इसकी हिदायत को कुबूल नहीं करते और इसके अहकाम पर अमल करके अपनी दुनिया और आखिरत को रौशन नहीं करतेl”

 

अगर कोई व्यक्ति केवल अल्लाह की रज़ा के लिए अल्लाह की इबादत करे इस तरह कि उसके ख़याल में केवल और केवल अल्लाह की रज़ा बस जाए और सुलूक के मर्तबे की उस मंजिल पर पहुँच जाए जहां उसे अल्लाह की रज़ा के सिवा कोई दुसरा ख़याल ना आता हो यह जरुर बेहतर है और यही इबादत का असल उद्देश्य हैl

 

इस्लाम का संदेश बहुत स्पष्ट हैl इसके बावजूद भी हम यह देखते हैं कि कुछ लड़ाका गिरोह जमीन के उपर आतंकवाद और फसाद मचा रहे हैंl ऐसे लड़ाकों के लीडर हो सकता है कि इस तरह के इस्लामी संदेशों से अवगत हों या अनभिज्ञ हों, लेकिन हमें यह बात दिमाग में रखनी चाहिए कि आज के युवा इस तरह के लीडरों के प्रोपेगेंडे का शिकार हो रहे हैंl इसी लिए हमें इस्लाम के असल पैगामों का प्रचार करते रहना चाहिए, इस आशा पर कि newageislam.com पर अतिवाद के खिलाफ हमारे संघर्ष के साकारात्मक परिणाम बरामद हो रहे हैंl

 

Why Imran Khan’s Invocation of Medina is Deeply Regressive  इमरान खान का मदीना को रोल मॉडल करार देना बहुत ही रुजअत पसंदाना रवय्या है: कुछ तथ्य
Arshad Alam, New Age Islam

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के लिए आवश्यक है कि अल्लाह की वहदानियत पर, अल्लाह की किताबों पर, कुरआन के आखरी आसमानी किताब होने पर, पैगम्बरे इस्लाम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के आखरी नबी होने पर, और इस बात पर कि आप के बाद अब कोई नबी नहीं होगा, कयामत के दिन पर और कुरआन और सुन्नत की सभी आवश्यकताओं और शिक्षाओं पर ईमान रखेl अब अगर प्रधानमंत्री के लिए यह शपथ है तो यह बात समझी जा सकती है कि क्यों अब भी मदीना मॉडल लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता हैl

 

Ban on Amr bil Maroof and Nahi Anil Munkar?  अम्र बिल मारूफ़ और नही अनिल मुनकर पर प्रतिबंध?
Shakeel Shamsi

अंग्रेज़ों के विरुद्ध फतवे जारी करने वाले उलेमा ने ना तो काले पानी की फ़िक्र की और ना तोप से उड़ाए जाने के डर से अपनी जुबान रोकी, लेकिन इस सच से कोई इनकार नहीं कर सकता कि हज़ारों उलेमा ऐसे भी हुए जिन्होंने हुकूमत के लुकमे खाने को ही अपना दीनी फरीज़ा समझा, मगर खुदा का करम यह है कि इस्लाम दोनों प्रकार के उलेमा की पहचान उलेमा ए हक़ और उलेमा ए सू के रूप में बहुत पहले ही कर चुका थाl इसलिए जब कोई आलिमे दीन किसी बादशाह के हाँ में हाँ मिलाता नज़र आया तो आम मुसलामानों ने फ़ौरन उसको पहचान लिया कि उसका संबंध उलेमा के किस वर्ग से हैl

 

Terrorism is not the Result of Unemployment Rahul G!  आतंकवाद बेरोजगारी का परिणाम नहीं है राहुल जी!
Shakeel Shamsi

जर्मनी के दौरे पर गए राहुल गांधी ने वहाँ एक जलसे में जहां मोदी सरकार की असफलताएँ गिनाईं वहीँ उन्होंने एक अजीब व गरीब बयान भी दियाl उन्होंने कहा कि देश में बेरोज़गारी है और जब लोगों को रोज़गार नहीं मिलेगा तो उनको बहकाने वाली शक्तियाँ भी सक्रिय हो सकती हैं, उन्होंने उदाहरण के रुप में आइएसआइएस का नाम लिया और कहा कि अमेरिका ने जब ईराक पर हमला किया तो तिकरीत के लोगों को बहुत अनदेखा किया जिसका वहाँ के युवाओं पर नाकारात्मक प्रभाव पड़ा और वह आइएसआइएस की ओर आकर्षित हो गएl राहुल गांधी ने यह भी कहा कि जब आप अपने युवाओं का ख़याल नहीं रखेंगे तो दुसरे उनको बहका सकते हैंl

 

Don’t Give Up, Just Try Something New and Look Ahead With Hope  हार न मानें, कुछ नया आज़माएं और उम्मीद के साथ आगे की ओर देखें
Maulana Wahiduddin Khan

मैं अक्सर ऐसे लोगों से मिलता रहता हूँ और मेरी यह जानने की कोशिश होती है कि वह कैसे ऐसी लत का शिकार हो गए हैं जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, मैं ने एक व्यक्ति से इसकी वजह पूछी, वह मुस्कुराया और मुझ से कहा “यह मेरे लिए एक भुलावा हैबिट है”l उसने मुझसे कहा वह अच्छी तरह यह जानता है कि यह एक जानलेवा लत है लेकिन इसके बावजूद मैंने इसे अपनाया ताकि मेरा दर्द कम हो सकेl

 

The Bogey of Islamophobia  इस्लामोफोबिया का दानव
Arshad Alam, New Age Islam

ब्रिटेन में रुढ़िवादियों का चेहरा माने जाने वाले ब्रूनी वारसी ने इस मौके पर टोरेस को अपने अन्दर सहज तौर पर मौजूद इस्लामोफोबिया और मुस्लिम विरोधी तास्सुब पर नज़र करने को कहाl अब तक अपनी पार्टी की ओर से दबाव के बावजूद बोरिस जॉन्सन ने माफी मांगने से इनकार कर दिया हैl उसके इस स्पष्ट इनकार के पीछे कई कारण हो सकते हैं और हो सकता है कि इन्हीं कारणों में से एक ऐसा करके अतिवादी वर्ग का वोट प्राप्त करने का रुढ़िवादी पार्टी का गुमान भी होl

 

कुरआन अपने अनुयायियों को सीमा (हद) से आगे बढ़े बिना कमज़ोर और पिछड़े लोगों की सुरक्षा के लिए केवल रक्षात्मक जंग की अनुमति देता है और इससे इस्लाम हिंसा का मजहब नहीं बनताl इसलिए जो लोग धार्मिक अत्याचार के खिलाफ बचाव में जंग की अनुमति से संबंधित कुरआनी आयतों को गलत अंदाज़ में पेश कर रहे हैं और अमन के साथ रहने वाले बेगुनाह व्यक्तियों को क़त्ल करने के लिए उनका प्रयोग कर रहे हैं वह असल में इस्लाम के मूल उद्देश्य की खिलाफवर्जी कर रहे हैं जो कि अमन का कयाम हैl

 

On the Meaning of Khatm e Nabuwwat  खत्मे नबूवत का अर्थ
Naseer Ahmed, New Age Islam

मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की उम्मत को उलेमा और इमामों की इताअत से भी आज़ाद रखा गया है, हर मुसलमान स्वयं कुरआन का अध्ययन कर सकता है और अपनी समझ के अनुसार उस पर अमल भी कर सकता हैl कुरआन एक ऐसी किताब है जो हक़ के रास्ते के चाहने वालों के लिए हर चीज को ऐसा स्पष्ट करके पेश करती है जिसमें संदेह की कोई गुंजाइश नहीं रहती है, इसमें किसी भी बहाने के तहत किसी भी बातिल की पैरवी की कोई गुंजाइश नहीं हैl अल्लाह ने हम में से हर एक को कुरआन के बारे में अपने इल्म और कुरआन की बेहतर समझ के अनुसार इसकी पैरवी करने की पूर्ण स्वतंत्रता प्रदान की हैl

 

How Imran Khan Will Set Up Medina-Like Islamic Welfare State?  इमरान खान मदीना की तरह इस्लामी कल्याणकारी राज्य कैसे स्थापित करेंगे?
Ghulam Rasool Dehlvi, New Age Islam

ध्यान देने योग्य बात यह है कि आम चुनाव से पहले पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ ने अपने मेनू फेस्टो में भी स्पष्ट रूप से अपना मिशन पाकिस्तान को एक ऐसा इस्लामी कल्याणकारी राज्य बनाना प्रदर्शित किया था जो मानवीय और न्यायप्रिय सिद्धांतों पर आधारित होगी जिस पर मीसाक़े मदीना का आधार थाl जो कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के राज्य में मानवाधिकार का एक लिखित घोषणापत्र थाl

 

The Myth of Jahiliyyah  जाहिलियत के दिनों का अफ़साना
Arshad Alam, New Age Islam

इस्लाम से पहले का वह दौर जैसा कि उसे जाहिलियत के दिन कहा जाता है वैसा ही है जैसा दुनिया के दुसरे क्षेत्रों में अंधियारे का राज रह चुका हैl और जिस प्रकार रौशन ख़याली ने यूरोप को अँधेरे युग से निकाल कर आधुनिकता की दहलीज पर ला कर खड़ा कर दिया इसी तरह इस्लाम ने भी उस अरब क्षेत्र और उसके नागरिकों को अत्याचार, अज्ञानता, बर्बरता और वहशत के अंधियारे से निकाल कर मानवता, इल्म व फिक्र, सभ्यता व संस्कृति, और रौशन ख़याली की एक नई सुबह से परिचित कियाl इस्लाम की आधुनिक इतिहास में सैयद क़ुतुब और मौदूदी के अनुसार अब भी इस दुनिया के अधिक क्षेत्र जाहिलियत के अँधेरे में डूबे हुए हैं और अपनी इस स्वयंभू अज्ञानता के अँधेरे से आज़ाद होने के लिए अब भी इस्लाम का मुंह तक रहे हैंl

 

हदीस के शारेहीन ने सामान्यतः इस भविष्यवाणी की व्याख्या यह की है कि ईसा अलैहिस्सलाम के नाज़िल होने के मौके पर कुफ्र का अंत और इस्लाम का बोलबाला हो जाएगाl तथापि निकटतम अतीत के प्रसिद्ध मुहद्दिस अल्लामा अनवर शाह कश्मीरी रहमतुल्लाह अलैह ने इस राय से मतभेद व्यक्त किया हैl उनका कहना है कि रिवायत में उस मौके पर इस्लाम के ग़ालिब आने का जो ज़िक्र हुआ है, उससे मुराद पूरी धरती नहीं, बल्कि सीरिया और उसके आस पास का विशिष्ट क्षेत्र है जहां सैयदना मसीह का नुज़ूल होगा और जो उस समय इस्लाम वालों और कुफ्र वालों के बीच दुविधा और युद्ध का केंद्र होगाl

 

Need of the Hour Is for Pakistan to Adopt the Prophet’s Delinking Policy  पाकिस्तान का नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की डिलिंकिंग नीति पर अग्रसर होना समय की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता
Maulana Wahiduddin Khan

इतिहास इस वास्तविकता का गवाह है कि इस्लाम के पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की डिलिंकिंग (delinking) नीति सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों तौर पर जबर्दस्त साबित हुईl इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें नए सिरे से योजना बनाने और कौम के निर्माण पर ध्यान केन्द्रित करने का मौक़ा मौजूद हैl दुसरे विश्व युद्ध के बाद बहुत सारे देशों ने इस नीति को अपनाया जिसके आधार पर उन्हें बड़ी सफलताएं मिलींl जर्मनी और जापान ने शिक्षा और वैज्ञानिक विकास के क्षेत्र में जबरदस्त सफलता प्राप्त कीl

 

Indian Secularism: Non-Religious, Irreligious or Anti-Religious?  भारतीय सेकुलरिज्म: गैर मज़हबी मज़हब बेज़ार या मज़हब विरोधी
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

बेशक भारत जैसे एक बहु सांस्कृतिक और बहु धार्मिक देश में सेकुलरिज्म एक आवश्यक भाग बन चुका हैl सेकुलरिज्म भारत की विशेषता बन चुकी है, और इसकी बुनियादी वजह यह है कि यह सभी धर्मों को बराबर सम्मान प्रदान करता है और इसके संविधान में सभी देशवासियों को अपने अपने धर्मों के अनुसार गुज़र बसर करने की अनुमति हैl इसलिए सभी धर्मों के अनुयायियों के लिए आवश्यक है कि वह भारतीय सेकुलरिज्म के इस बुनियादी कल्पना को दिमाग में रखें और देश में अमन व शांति कायम रखें, इसके लिए उन्हें सामूहिक रूप में शांतिपूर्ण सह अस्तित्व के प्वाइंट को मजबूत करना होगाl

 

The Language of the Quran  कुरआन की भाषा
Naseer Ahmed, New Age Islam

कुरआन के अन्दर हर कीवर्ड और कल्पना को उन दूसरी आयतों की सहायता से अच्छी तरह समझा जा सकता है जिनमें वह कीवर्ड (कलीदी अलफ़ाज़) वारिद हुए हैं और इससे किसी भी प्रकार की व्याख्या की आवश्यकता भी दूर हो जाती है और इस प्रकार कुरआन की हर आयत से एक स्पष्ट अर्थ निकाला जा सकता है और कुरआन का यह दावा बिलकुल सहीह है कि यह एक स्पष्ट किताब हैl

 

Why are Islamic countries not coming forward to take Rohingyas?  इस्लामी देश रोहंगिया मुसलामानों की सहायता के लिए आगे क्यों नहीं आ रहे हैं? क्या मानवाधिकार केवल मुसलामानों के लिए है?
Ghulam Rasool Dehlvi, New Age Islam

न्यू एज इस्लाम के एडीटर जनाब सुलतान शाहीन ने प्राइम टाइम टीवी के बहस में एक और महत्वपूर्ण प्रश्न यह उठाया कि क्यों इस्लामी देश रोहंगिया मुसलामानों को पनाह देने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं? उन्होंने कहा कि “सीरिया के शरणार्थियों को जर्मनी और दुसरे योरोपियन देशों ने पनाह दी है लेकिन मुस्लिम देश उन्हें शरणार्थी का स्थान देकर भी उनकी सहायता नहीं कर रहे हैंl यह वास्तव में वैश्विक मुस्लिम बिरादरी के लिए एक सामूहिक रूप से अपमान की बात है कि इस्लामी देश रोहंगिया शरणार्थियों से अपना मुंह मोड़ रहे हैं”l

 

Why Should an Academic Course on Islamist Terror Rile Muslims?  इस्लामी आतंकवाद पर शैक्षणिक कोर्स पेश किए जाने से मुसलमानों में गुस्सा क्यों?
Arshad Alam, New Age Islam

उन्हें इस्लाम की किसी भी मौजूदा आलोचना पर खुल कर बहस करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए इस आत्मनिरीक्षण के बिना यह समझना बहुत कठिन है कि हम हिंदुस्तानी मुसलमान की हैसियत से किस तरह हमारे आस पास की दुनिया के साथ सद्भाव स्थापित करने में सफल होंगेl अगर हम यह स्वीकार नहीं करते कि किसी दुसरे धर्म की तरह इस्लाम भी आतंकवाद का कारण बन सकता है तो हमारे अन्दर एक ऐसा काल्पनिक दृष्टिकोण परवान चढ़ेगा कि जिसमें मुसलमान मज़लूम दिखेंगे और 11/9 जैसी आतंकवादी घटनाएं ईसाईयों की साज़िश लगेगीl

 
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  • so the historians who accompanied the marauders were dishonest.but bernard lewis is the very epitome of honest.your dishonesty is astounding.just as it suits you ...
    ( By hats off! )
  • there is an uncontrollable deceit and dishonesty in every comment you write.and your puny logical capacity cannot see that religious texts are full of ...
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    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • Sagacious and cogent article! Transmitting this message to the masses in Pakistan is an almost impossible task.
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • Is this Asian Age report generally accepted as being factual or not?http://www.asianage.com/delhi/najeeb-ahmed-was-asked-leave-hostel-october-15-912
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • The entire wahabiyat and deobandiyat consider  celebration of mawlid Nabi to be bidat. and therefore they bomb participants of Juluse Muhammadiya
    ( By Talha@gmail.com )
  • Suicide attack at Afghan religious gathering kills over 50Dozens of people were wounded in the attack, health ministry spokesman says, which targeted top clerics ...
    ( By Ghulam Ghaus Siddiqi غلام غوث الصديقی )
  • The author is living abroad. If he lives in Pakistan he would not have written this audacious article.If he wrote, sure, he would be assassinated.
    ( By dr.A.Anburaj )
  • This article is surprising me.Thanks the author for writing this article which aims to protect minorities in Pakistan.But minorities have no hope in Pakistan. ...
    ( By dr.A.Anburaj )
  • Congrats on this auspicious occasion of Mawlid Nabi
    ( By Sarwar )
  • اسلام میں جمہوریت کا مقاماسلام کا مقصد دنیا بھر کے اچھے لوگوں کو ایک مشترکہ مقصد، ناانصافی اور تشدد کے خلاف لڑنے کے لئے ...
    ( By Abdul Moid Azhari )
  • Well put. There are crimes in which one complies through silence but then here, left's complicity is of a far higher degree. Their complicity with ...
    ( By Areeb Rizvi )
  • logic was never your forte.let me try to really make it simple enough for you.aggression has biological, evolutionary and genetic basis.men are biological, evolutionary ...
    ( By hats off! )
  • Extremely shameful and sad! If such things can happen at JNU, and in the national capital, what remains of justice and decency?
    ( By Naseer Ahmed )
  • Muslim historians accompanying Muslim conquerors said what their masters wanted to hear. Their exaggerations get quoted by pseudo-historians like Ariel and Will Durant who ...
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • Hats Off says aggression is a biological fact but then goes on to blame monotheistic religions for it! Such a person would say anything ...
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • “WITH EXCEPTIONS, WHATEVER CREATIVE AND SIGNIFICANT IN JEWISH LIFE HAPPENED IN ISLAMIC LAND.” [highlight in capital letter is mine]
    ( By T.O. Shanavas )
  • Mr. Hats Off asked quotes from anti-Muslim authors. Let me quote from his favorite author, Bernard Lewis.
    ( By T.O. Shanavas )
  • Oxford Research Encyclopedia states:“Muslim-Jewish relations began with the emergence of Islam in 7th-century Arabia, but contacts between pre-Jewish Israelites and pre-Muslim Arabs had been ...
    ( By T.O. Shanavas )
  • just as for the fraudulent "moderates" it is the other way round. you have your evidence, others have theirs. don't whine and wheeze.the historical ...
    ( By hats off! )
  • aggression is a biological fact. aggression is an evolutionary need. aggression is a hard wired trait.that is precisely why much of religious text (especially ...
    ( By hats off! )
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    ( By Ghulam Mohiyuddin )
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    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • A slap in the face of those who claim that aggression is a product of religions!
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
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  • this is not for mr. t.o shanavascan we quote other authors who entirely disagree with these "khandaani" experts?
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    ( By T.O. Shanavas )
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